केरल हाईकोर्ट ने सॉफ्टवेयर कंपनी मालिक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को कोच्चि स्थित एक सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उन पर महिला कर्मचारी के साथ यौन उत्पीड़न करने और उसे तथा उसके पति को झूठे आपराधिक मामले में फंसाने का आरोप है।

जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने 50 वर्षीय कक्कनाड निवासी वेनू गोपालकृष्णन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं। अदालत ने कहा कि इस स्थिति में अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित होगी।

अदालत ने कहा, “जब किसी संस्थान का मालिक स्वयं गंभीर अपराधों, जिनमें बलात्कार भी शामिल है, का आरोपी हो और आरोप प्रथम दृष्टया सही साबित होते हों, तो उसे अग्रिम जमानत देना जांच को निष्प्रभावी बना देगा।” अदालत ने यह भी आशंका जताई कि गोपालकृष्णन अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सबूतों के साथ छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

जुलाई में पीड़िता और उसके पति को पुलिस ने इस आरोप में गिरफ्तार किया था कि वे गोपालकृष्णन को ‘हनी-ट्रैप’ करने की कोशिश कर रहे थे। बाद में दोनों को जमानत मिल गई और महिला ने अदालत का रुख कर कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है।

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इसके बाद अदालत के निर्देश पर पुलिस ने अगस्त में गोपालकृष्णन और उनकी कंपनी के तीन कर्मचारियों — जैकब थंपी, ईबी पॉल और बिमलराज हरिदास — के खिलाफ नया मामला दर्ज किया। उन पर यौन उत्पीड़न, महिला की मर्यादा भंग करने और आपराधिक धमकी देने का आरोप है।

हालांकि अदालत ने गोपालकृष्णन की जमानत याचिका खारिज कर दी, लेकिन उनके तीनों कर्मचारियों को अग्रिम जमानत दे दी गई। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ केवल धमकी देने से जुड़े आरोप हैं, इसलिए उन्हें शर्तों के साथ राहत दी जा सकती है।

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अदालत ने पुलिस जांच में गंभीर खामियों की ओर भी इशारा किया। जस्टिस थॉमस ने कहा, “यौन उत्पीड़न के आरोप की जिस तरह से जांच की जा रही है, वह अदालत का विश्वास नहीं जगा पा रही है।”

अदालत ने यह भी पाया कि पीड़िता के मोबाइल फोन और लैपटॉप 29 जुलाई को जब्त किए गए थे, लेकिन न तो किसी ज़ब्ती पंचनामा के तहत और न ही तुरंत मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए गए। ज़ब्ती पंचनामा 8 अगस्त को तैयार किया गया, जिससे यह संभावना बनी रही कि उस अवधि में उपकरण किसी और के कब्ज़े में रहे होंगे।

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गोपालकृष्णन इससे पहले उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने अपनी लैम्बॉर्गिनी उरुस कार का पंजीकरण नंबर लेने के लिए 45.99 लाख रुपये चुकाए थे।

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