एम.एफ. हुसैन की पेंटिंग्स पर धार्मिक भावनाएं आहत होने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने से दिल्ली हाईकोर्ट ने किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि पद्म पुरस्कार से सम्मानित दिवंगत कलाकार एम.एफ. हुसैन की दो पेंटिंग्स ने धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और इस पर एफआईआर दर्ज की जाए।

न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि इस मामले में जांच की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सभी तथ्य पहले से ही अदालत के समक्ष हैं। उन्होंने टिप्पणी की, “सब कुछ पहले से ही अदालत के सामने है। अदालत को तय करना है कि भावनाएं आहत हुईं या नहीं। जांच की कहां ज़रूरत है।”

यह आवेदन अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने दायर किया था, जिन्होंने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि किसी अतिरिक्त जांच की आवश्यकता नहीं है और मामला निजी शिकायत के रूप में आगे बढ़ सकता है।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सचदेवा ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से यह मुकदमा नहीं लड़ पा रही हैं। उन्होंने अदालत से कहा, “मुझे यह पता करना होगा कि गैलरी में कौन-कौन आया था और किसकी भावनाएं आहत हुईं।”

निचली अदालत में दाखिल शिकायत में एक आर्ट गैलरी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई थी, जहां हनुमान और गणेश को दर्शाने वाली एम.एफ. हुसैन की दो पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई थीं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इन चित्रों का प्रदर्शन धार्मिक भावनाओं के लिए आपत्तिजनक है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

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हाईकोर्ट ने दोहराया कि यह मुद्दा जांच का नहीं बल्कि कानूनी निर्णय का है। अदालत ने साफ किया कि शिकायतकर्ता को यह मामला निजी शिकायत के रूप में आगे बढ़ाना होगा, न कि किसी सरकारी जांच एजेंसी के माध्यम से।

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