कर्नाटक हाईकोर्ट में विजय माल्या और यूबीएचएल निदेशक की याचिका पर सुनवाई, बैंक रिकवरी का पूरा ब्यौरा मांगा

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भगोड़े कारोबारी विजय माल्या और अब परिसमाप्त हो चुकी यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (UBHL) के निदेशक दलजीत महल की याचिकाओं को सितंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। इन याचिकाओं में बैंकों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे कर्ज वसूली से संबंधित विस्तृत खाता विवरण प्रस्तुत करें।

याचिकाकर्ताओं ने आग्रह किया है कि संबंधित बैंक उन्हें ऐसे ब्योरे उपलब्ध कराएं, जिनमें बकाया राशि, समय-समय पर लगने वाला ब्याज, पहले से की गई रिकवरी का समायोजन और ऋण चुकाने में प्रयुक्त संपत्तियों का पूरा विवरण शामिल हो। यह मांग ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) द्वारा 10 अप्रैल 2017 को जारी संशोधित रिकवरी प्रमाणपत्र के संदर्भ में की गई है।

न्यायमूर्ति बी.एम. श्याम प्रसाद ने कहा कि वर्तमान याचिका और एक अन्य मामला (WP 3357/2025) समान मुद्दों से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सजन पोवैया ने दोनों मामलों को साथ में सुनने का सुझाव दिया। अदालत ने अधिवक्ता चंद्रकांत के. पाटिल, जो पहले से जुड़े मामले में प्रतिवादियों की ओर से पेश हो रहे हैं, को इस याचिका में भी नोटिस स्वीकार करने का निर्देश दिया। अब इन याचिकाओं पर 15 सितंबर को सुनवाई होगी।

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माल्या और महल की ओर से पोवैया ने दलील दी कि किंगफिशर एयरलाइंस और यूबीएचएल के खिलाफ परिसमापन आदेश सर्वोच्च न्यायालय तक में अंतिम रूप से कायम हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों ने माल्या और उनकी कंपनियों से पहले ही पर्याप्त वसूली कर ली है।

उनके अनुसार, डीआरटी ने मूल रूप से 6,200 करोड़ रुपये के भुगतान का आदेश दिया था, जिसमें किंगफिशर एयरलाइंस प्रमुख देनदार और यूबीएचएल गारंटर थी। लेकिन, 2017 से अब तक बैंकों ने इससे कहीं अधिक वसूली कर ली है।

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“रिकॉर्ड के अनुसार, बैंकों ने लगभग 10,200 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं और यहां तक कि आधिकारिक परिसमापक ने भी माना है कि बैंकों की भरपाई हो चुकी है। वित्त मंत्री ने संसद में कहा था कि वसूली की राशि 14,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है,” पोवैया ने कहा।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि बैंकों को अब तक की गई वसूली का पूरा विवरण प्रस्तुत करने और उन संपत्तियों का खुलासा करने का निर्देश दिया जाए, जो उनके, यूबीएचएल या किसी तीसरे पक्ष के स्वामित्व में थीं और ऋण चुकाने के लिए उपयोग में लाई गईं। साथ ही उन संपत्तियों का भी ब्यौरा मांगा गया है जो अभी तक बैंकों के पास हैं लेकिन ऋण समायोजन के लिए प्रयुक्त नहीं हुई हैं।

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अंतरिम राहत के रूप में याचिका में आगे की वसूली कार्रवाई पर रोक लगाने, जिसमें डीआरटी के 2017 के संशोधित रिकवरी प्रमाणपत्र के आधार पर की जाने वाली नई नीलामियां भी शामिल हैं, का अनुरोध किया गया है।

इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

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