सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच को दी मंजूरी, अभियुक्तों की याचिकाएं खारिज

बुधवार को एक अहम फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु के रियल एस्टेट व्यवसायी के. रघुनाथ की 2019 में कथित हत्या की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने के कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और अभियुक्तों की अपीलों को खारिज कर दिया। यह फैसला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुनाया।

पीठ ने स्पष्ट किया कि एक बार एफआईआर दर्ज हो जाने और जांच शुरू हो जाने के बाद, किसी विशेष एजेंसी को जांच सौंपने का निर्णय संदिग्धों या अभियुक्तों द्वारा चुनौती नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, “किसी एजेंसी को जांच सौंपने का निर्णय मूल रूप से न्यायालय के विवेकाधिकार का विषय है।”

यह मामला के. रघुनाथ की रहस्यमयी मौत से जुड़ा है, जो एक प्रसिद्ध बिल्डर थे और दिवंगत सांसद डी.के. आदिकेशवला के करीबी सहयोगी माने जाते थे। उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद परिवार ने साजिश की आशंका जताई और आदिकेशवला के कई करीबी सहयोगियों पर आरोप लगाए।

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स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता के बावजूद, रघुनाथ की पत्नी म. मंजुला ने निजी शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर हत्या और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज हुई।

मामला तब निर्णायक मोड़ पर पहुंचा जब कर्नाटक हाई कोर्ट ने प्रारंभिक जांच में खामियों और स्थानीय प्रभावों को देखते हुए मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर CBI जांच का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि इस तरह के जटिल मामले, जिनमें संपत्ति विवाद और कथित जालसाजी जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं, में निष्पक्ष और गहन जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की भूमिका आवश्यक है।

शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित पुलिस विभाग 15 दिनों के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज CBI को सौंपे और CBI को आठ महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। जांच के परिणामस्वरूप यदि आरोपपत्र दाखिल होता है, तो वह कर्नाटक स्थित सक्षम CBI अदालत में पेश किया जाएगा।

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