कोर्ट में अनुचित व्यवहार पर एमपी हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट को जारी किया शो-कॉज नोटिस

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम कदम उठाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नरिंदर पाल सिंह रूपड़ा को कोर्टरूम में अनुचित व्यवहार के आरोप में शो-कॉज नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में उनकी वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में मान्यता पर सवाल उठाया गया है और उनसे पूछा गया है कि क्यों न उनकी यह उपाधि वापस ले ली जाए।

यह कार्रवाई 8 अप्रैल 2025 को जारी आदेश के तहत की गई, जो वाद संख्या 39118/2024 (एम/एस माँ नर्मदा एसोसिएट्स बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य) की सुनवाई से संबंधित है। यह घटना 7 अप्रैल 2025 को कोर्ट नंबर 1 में हुई थी, जिसकी कार्यवाही कोर्ट प्रोटोकॉल के तहत लाइव-स्ट्रीम और रिकॉर्ड की गई थी।

कोर्ट के आदेश के अनुसार, जब अदालत ने प्रतिवादी क्रमांक 5 की उपस्थिति के बारे में पूछा, तो श्री रूपड़ा ने अत्यधिक ऊँची आवाज़ में बोलते हुए कोर्ट में अव्यवस्था उत्पन्न कर दी। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है:

“उन्होंने कोर्ट में जोर-जोर से चिल्लाते हुए हंगामा किया, जो कोर्ट की लाइव-स्ट्रीम रिकॉर्डिंग में दर्ज है… आज के उनके व्यवहार को देखते हुए, हमें यह विचार करना आवश्यक लगता है कि क्या वे वरिष्ठ अधिवक्ता के योग्य बने रह सकते हैं।”

कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (वरिष्ठ अधिवक्ताओं की नामांकन) नियम, 2018 के नियम 22 के तहत कार्यवाही करते हुए प्रमुख रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया है कि वे श्री रूपड़ा से जवाब तलब करें। श्री रूपड़ा को 8 मई 2025 तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

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इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने उन्हें वर्तमान पीठ के समक्ष पेश होने से भी प्रतिबंधित कर दिया है, जब तक कि अगला आदेश पारित न हो।

मामला क्या है?

यह विवाद एक रिट याचिका से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसने शराब का स्टॉक प्रतिवादी क्रमांक 5 को सौंपा था, जो बाद में कथित रूप से गायब हो गया। कोर्ट ने प्रतिवादी के प्रतिनिधियों के बयानों में परस्पर विरोधाभास पाया और लाखों रुपये मूल्य की शराब के लापता होने पर गंभीर सवाल उठाए।

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हालाँकि प्रतिवादी क्रमांक 5 की ओर  समझौते का आवेदन दायर किया गया था, लेकिन स्टॉक की प्राप्ति से इनकार किए जाने पर कोर्ट ने आश्चर्य जताया।

कोर्ट ने इस मामले में प्रतिवादी क्रमांक 5 के प्रमुख प्रतिनिधियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही, रजिस्ट्रार (आईटी) को निर्देशित किया गया है कि लाइव-स्ट्रीम की रिकॉर्डिंग को संरक्षित किया जाए ताकि इसे फुल कोर्ट के समक्ष समीक्षा हेतु प्रस्तुत किया जा सके।

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