राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि इनकम टैक्स अधिकारियों को किसी व्यक्ति के निजी ईमेल, सोशल मीडिया या बैंक खातों तक असीमित पहुंच की अनुमति नहीं है। यह आश्वासन वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी द्वारा असित तारांकित प्रश्न संख्या 2784 के लिखित उत्तर में दिया गया, जो सांसद श्री ऋतब्रत बनर्जी द्वारा पूछा गया था।

मंत्री ने बताया कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 132 के अंतर्गत अधिकारियों को केवल तलाशी और जब्ती (सर्च और सीज़र) की कार्रवाई के दौरान इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे गए लेखा पुस्तकों या दस्तावेजों की जांच करने का अधिकार है। यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ट) के अनुसार है। ऐसे मामलों में यदि जांच के दौरान व्यक्ति के पास या उसके नियंत्रण में डिजिटल रिकॉर्ड हैं, तो अधिकारी उन्हें देखने की मांग कर सकते हैं।
नए इनकम टैक्स बिल, 2025 में भी धारा 247 की उपधारा (1) के खंड (ii) के तहत इसी प्रकार का प्रावधान शामिल किया गया है। विशेष रूप से तब, जब जांच के दौरान व्यक्ति सहयोग नहीं करता और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के एक्सेस कोड उपलब्ध नहीं होते, तो सक्षम अधिकारियों को उचित प्राधिकरण मिलने पर इन कोड्स को बायपास करने की अनुमति होती है।

इस प्रकार, इनकम टैक्स अधिकारी आपकी सोशल मीडिया प्रोफाइल या ईमेल अकाउंट को स्वतंत्र रूप से एक्सेस नहीं कर सकते, लेकिन तलाशी और जब्ती जैसी वैधानिक रूप से स्वीकृत परिस्थितियों में, सीमित और अधिकृत रूप से ऐसा किया जा सकता है।