एक महत्वपूर्ण फैसले में, माननीय न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अध्यक्षता में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भरण-पोषण के मामले में हो रही अत्यधिक देरी पर चिंता व्यक्त की है। यह मामला राजेश बाबू सक्सेना (पुनरीक्षक) और उनकी अलग रह रही पत्नी, श्रीमती XYZ (प्रतिवादी) से संबंधित है। यह मामला, जिसका शीर्षक CRIMINAL REVISION DEFECTIVE No. 1789
