खरीदे गए सामान के कैरी बैग का अलग से शुल्क लेना अनुचित, 24 सेवन स्टोर पर जुर्माना

पंजाब के रूपनगर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि रिटेल स्टोर खरीदे गए सामान की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल होने वाले कैरी बैग का ग्राहकों से अलग से शुल्क नहीं वसूल सकते। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार देते हुए ज़िरकपुर स्थित 24 सेवन कंविनियंस स्टोर को ग्राहक को 10 रुपये का रिफंड देने और 1,600 रुपये का मुआवजा व कानूनी खर्च चुकाने का निर्देश दिया है।

ज़िरकपुर के स्टोर में खरीदारी से जुड़ा मामला

यह विवाद 1 जनवरी 2022 का है, जब अनीश कंसल नामक ग्राहक ने ज़िरकपुर के सिंहपुरा स्थित स्क्वायर वन मॉल में मौजूद 24 सेवन कंविनियंस स्टोर से लगभग 943 रुपये का ग्रॉसरी और खाने-पीने का सामान खरीदा था। स्टोर द्वारा जारी बिल में 20 × 20 इंच के नॉन-वोवेन कैरी बैग के लिए 10 रुपये का अतिरिक्त शुल्क जोड़ा गया था।

कंसल ने इस शुल्क को गैर-वाजिब बताते हुए स्टोर को कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस का कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और आरोप लगाया कि सामान ले जाने के लिए जबरन कैरी बैग बेचना अनुचित व्यापार प्रक्रिया है।

एकतरफा कार्यवाही और आयोग का फैसला

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मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष कुलजीत पाल सिंह और सदस्य रणवीर कौर तथा रमेश कुमार गुप्ता की पीठ ने की। 24 सेवन कंविनियंस स्टोर ने उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019 के तहत निर्धारित समयावधि में न तो अपना लिखित जवाब पेश किया और न ही कार्यवाही में भाग लिया। इसके बाद आयोग ने स्टोर के खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्यवाही करते हुए धारा 38(3)(c) के तहत रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर 9 जुलाई को अपना आदेश जारी किया।

कानूनी प्रावधान और आयोग की टिप्पणियां

अपने आदेश में आयोग ने वस्तु विक्रय अधिनियम, 1930 (सेल ऑफ गुड्स एक्ट) की धारा 36(5) का संदर्भ दिया। इस धारा के अनुसार, जब तक कोई अलग अनुबंध न हो, सामान को हस्तांतरणीय या डिलीवरी योग्य स्थिति में लाने का सारा खर्च विक्रेता को ही उठाना होता है। आयोग ने माना कि इस मामले में नॉन-वोवेन कैरी बैग कोई स्वतंत्र व्यावसायिक उत्पाद के रूप में नहीं खरीदा गया था, बल्कि इसका उपयोग केवल खरीदे गए सामान को पैक करके सौंपने के लिए किया गया था।

पीठ ने यह भी कहा कि ब्रांडेड कैरी बैग पर स्टोर का नाम और लोगो छपा होता है, जो असल में कंपनी के अपने प्रचार और विज्ञापन का काम करता है। ऐसी स्थिति में कमर्शियल डिलीवरी का खर्च ग्राहकों पर डालना अनुचित लाभ उठाने और सेवा में लापरवाही के समान है।

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ग्राहकों की पूर्व सहमति अनिवार्य

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के ‘बिग बाजार (फ्यूचर रिटेल लिमिटेड) बनाम साहिल डावर’ मामले का हवाला देते हुए जिला आयोग ने कहा कि बिलिंग काउंटर पर पहुंचने के बाद उपभोक्ताओं पर कैरी बैग शुल्क नहीं थोपा जा सकता। व्यापारियों का यह दायित्व है कि वे खरीदारी शुरू करने और सामान का चयन करने से पहले ही ग्राहकों को ऐसे किसी भी शुल्क की जानकारी दें।

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रिफंड और मुआवजे के निर्देश

उपभोक्ता आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए 24 सेवन कंविनियंस स्टोर को 10 रुपये का कैरी बैग शुल्क वापस करने का आदेश दिया। इसके अलावा, मानसिक उत्पीड़न और असुविधा के लिए 500 रुपये का मुआवजा तथा 1,100 रुपये कानूनी लागत के रूप में देने का निर्देश दिया।

रिटेलर को प्रमाणित आदेश की प्रति मिलने की तारीख से 45 दिनों के भीतर इस फैसले का पालन करना होगा। तय समयसीमा के भीतर भुगतान न करने की स्थिति में शिकायतकर्ता को उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019 के तहत निष्पादन (एग्जीक्यूशन) की कार्यवाही शुरू करने की छूट दी गई है।

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