केवल इसलिए कि एक वकील की राजनीतिक पृष्ठभूमि थी, जजशिप से इनकार करने का पर्याप्त कारण नहीं है: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केरल हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए कुछ सिफारिशें कीं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के लिए केरल हाईकोर्ट के छह अधिवक्ताओं के नाम की सिफारिश की।

केरल हाईकोर्ट में कॉलेजियम की सिफारिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा श्री मनोज पुलम्बी माधवन के संबंध में है।

कॉलेजियम ने कहा कि न्याय मंत्रालय ने केरल हाईकोर्ट में न्यायाधीश पद के लिए श्री माधवन की उम्मीदवारी के संबंध में निम्नलिखित टिप्पणी की है:

“मनोज पुलम्बी माधवन को सीपीआई (एम) का समर्थक माना जाता है। उन्हें एलडीएफ सरकार द्वारा 2010 और 2016-2021 में सरकारी वकील के रूप में नियुक्त किया गया था।

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कॉलेजियम ने न्याय विभाग के उपर्युक्त इनपुट पर विचार किया और कहा:

उपरोक्त इनपुट कि उम्मीदवार को “सीपीआई (एम) का समर्थक माना जाता है” बेहद अस्पष्ट है। इसी तरह, एलडीएफ सरकार द्वारा उन्हें 2010 और 2016-2021 में सरकारी वकील के रूप में नियुक्त किया गया था, जो उनकी उम्मीदवारी को अस्वीकार करने का वैध आधार नहीं है। वास्तव में, सरकारी वकील के रूप में उम्मीदवार की नियुक्ति यह संकेत देगी कि उसने उन मामलों को संभालने में पर्याप्त अनुभव प्राप्त किया होगा जहां राज्य कानून की विभिन्न शाखाओं में एक पक्ष है। यह इनपुट कि उम्मीदवार को सीपीआई (एम) का समर्थक माना जाता है, अन्यथा अस्पष्ट और ठोस आधार से रहित है।

अन्यथा भी, केवल यह तथ्य कि उम्मीदवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है, सभी मामलों में पर्याप्त कारण नहीं हो सकता है। उदाहरण के लिए, हाल ही में, एक वकील को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है, हालांकि वह पदोन्नति से पहले एक राजनीतिक दल की पदाधिकारी थी।

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वर्तमान मामले में, बार में पर्याप्त अभ्यास के साथ एससी उम्मीदवार होने के नाते उम्मीदवार हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के योग्य है। उनके प्रदर्शन को हाईकोर्ट के कॉलेजियम के सदस्यों द्वारा देखा गया था, जिन्हें एक वकील के रूप में उनकी क्षमता और आचरण का निरीक्षण करने का अवसर मिला था, उनकी राय को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

इसलिए, कॉलेजियम का विचार है कि उम्मीदवार हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए उपयुक्त है।”

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