हाल ही में, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी गैर-मान्यता प्राप्त संस्थान को छह महीने का चिकित्सा पाठ्यक्रम संचालित करने और डिप्लोमा प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति देने से समाज में विनाशकारी परिणाम होंगे। न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम, याचिकाकर्ताओं के अभ्यास करने के अधिकार में हस्तक्षेप करने से प्रतिवादियों को मना करने के लिए दायर
