महाराष्ट्र के ठाणे जिले की मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने एक व्यक्ति को ₹4.19 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है, जो 2016 में एक ऑटो रिक्शा दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था।
एमएसीटी के सदस्य आर.वी. मोहिटे ने अपने 22 अगस्त के आदेश (जो शनिवार को उपलब्ध हुआ) में ऑटो रिक्शा चालक को, जो कार्यवाही के दौरान अनुपस्थित रहा, निर्देश दिया कि वह याचिका दायर करने की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज सहित मुआवजा अदा करे।
यह हादसा 21 जून 2016 को हुआ था, जब दावेदार सचिन अनिल बोकिल (45), जो ठाणे पश्चिम में रहने वाले एक डेंटल तकनीशियन हैं, ऑटो रिक्शा का इंतज़ार कर रहे थे। तभी तेज़ रफ़्तार से आ रहे एक रिक्शा ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वे कंक्रीट डिवाइडर पर गिर गए। हादसे के बाद उन्हें कई सर्जरी और न्यूरोलॉजिकल उपचार से गुजरना पड़ा।

बोकिल ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत शुरुआत में ₹25 लाख का दावा दायर किया था, जिसे बाद में घटाकर ₹1 लाख कर दिया। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड पेश किए और कई अस्पताल प्रशासकों व एक न्यूरोसर्जन को गवाही के लिए बुलाया।
ट्रिब्यूनल ने माना कि याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आई थीं, लेकिन उसने यह भी दर्ज किया कि विकलांगता प्रमाण पत्र के बावजूद बोकिल अपनी नौकरी पर कार्यरत रहे और उनके वेतन में कोई कमी नहीं हुई। इसलिए न्यायाधिकरण ने मुआवजे का आकलन मुख्य रूप से वास्तविक चिकित्सा खर्च और पीड़ा-सहन के आधार पर किया।
अधिकरण ने कुल मुआवजा ₹12.19 लाख तय किया। इसमें से बोकिल पहले ही ऑटो रिक्शा मालिक के साथ ₹8 लाख का निपटारा कर चुके थे। ट्रिब्यूनल ने अब चालक को शेष ₹4.19 लाख का भुगतान करने का निर्देश दिया है।