तेलंगाना हाईकोर्ट ने ब्रह्मोस के डीजी जयतीर्थ आर जोशी की नियुक्ति रद्द करने वाले CAT आदेश पर लगाई अंतरिम रोक

तेलंगाना हाईकोर्ट ने बुधवार को जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस के डायरेक्टर जनरल (DG) के रूप में नियुक्त करने के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) द्वारा पारित आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। जोशी को यह राहत एक डिवीजन बेंच ने दी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जी. एम. मोहिउद्दीन शामिल थे।

जयतीर्थ आर. जोशी को 25 नवंबर 2024 को ब्रह्मोस के डीजी और ब्रह्मोस एयरोस्पेस के CEO और MD के रूप में नियुक्त किया गया था, और उन्होंने 1 दिसंबर 2024 को पदभार ग्रहण किया था। हालांकि, DRDO के विशिष्ट वैज्ञानिक शिवसुब्रमण्यम नंबी नायडू ने इस नियुक्ति को CAT में चुनौती दी थी।

CAT ने 29 दिसंबर 2025 को जोशी की नियुक्ति को रद्द कर दिया और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह नायडू के आवेदन पर पुनर्विचार करे। इसके खिलाफ जोशी और केंद्र सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया।

जोशी ने अपनी याचिका में कहा कि उनकी नियुक्ति पूरी तरह से प्रक्रिया का पालन करते हुए हुई थी और नायडू ने किसी प्रक्रिया संबंधी उल्लंघन का आरोप नहीं लगाया है। उन्होंने कहा कि नायडू केवल इस बात का दावा कर रहे हैं कि पद के लिए विज्ञापन मात्र औपचारिकता थी।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि CAT ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश दिया है कि नायडू जैसे अन्य उम्मीदवारों पर विचार किया जाए। जोशी ने कहा कि वह सभी पात्रता मानकों को पूरा करते हैं और चयन समिति द्वारा निष्पक्ष रूप से उनका चयन किया गया।

जोशी के अधिवक्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि केवल वरिष्ठता नहीं, बल्कि उपयुक्तता (suitability) नियुक्ति का मुख्य आधार है। तीन योग्य उम्मीदवारों में से उच्च स्तरीय समिति ने जोशी को चुना था और ऐसे निर्णयों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती जब तक कि वे किसी अवैधता से ग्रसित न हों।

नायडू ने CAT के समक्ष कहा था कि उन्हें तीन प्रधानमंत्री पुरस्कार, चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी द्वारा त्रि-सेना प्रशंसा पदक और कई अन्य प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुए हैं जो DRDO से संबंधित कार्य में उनकी उपलब्धियों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद जोशी की नियुक्ति पहले से तय थी और उनके योग्यता का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया।

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हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद CAT के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।

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