इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद निर्देश दिया कि आदेश सुनाए जाने तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। अदालत का फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में आने की संभावना है।
यह मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें स्वामी पर दो व्यक्तियों के यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। आरोपों में एक पीड़ित के नाबालिग होने का भी उल्लेख है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा निराधार है और उन्हें झूठा फंसाया गया है। इसी आधार पर गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग करते हुए अग्रिम जमानत की प्रार्थना की गई थी।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया और तब तक के लिए स्वामी को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अब नजर मार्च के तीसरे सप्ताह पर है, जब अदालत यह तय करेगी कि उन्हें अग्रिम जमानत दी जाए या नहीं।

