सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के “असमान” अनुपालन पर गंभीर चिंता जताते हुए 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार, जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है।
न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एस. वी. एन. भट्टी की पीठ ने 19 फरवरी को यह आदेश पारित किया। यह आदेश भोपाल नगर निगम द्वारा SWM नियम, 2016 के अनुपालन से जुड़े नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के विरुद्ध दायर दो अपीलों की सुनवाई के दौरान दिया गया।
पीठ ने कहा कि मौजूदा खामियों के रहते और विधायी सुधार की प्रतीक्षा करना उचित नहीं है। ठोस अपशिष्ट की उपेक्षा का असर स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ता है।
अदालत ने कहा:
“MSW/SWM नियमों का अनुपालन देशभर में असमान है… स्रोत पर गीले, सूखे और खतरनाक कचरे का पृथक्करण अभी भी पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पाया है।”
पीठ ने महानगरों में सक्रिय बड़े डंपसाइट्स पर भी चिंता जताई और कहा कि आर्थिक विकास के साथ कचरे की मात्रा बढ़ना भी एक कारण है।
अदालत ने कहा:
“अब नहीं तो कभी नहीं। स्रोत पर पृथक्करण और बुनियादी ढांचे के बिना उच्च परिणाम की अपेक्षा करना अव्यावहारिक है। प्रत्येक हितधारक का कर्तव्य है कि वह कचरा-मुक्त भारत सुनिश्चित करे।”
अदालत ने पार्षदों, महापौरों, वार्ड सदस्यों और कॉरपोरेटरों को स्रोत-स्तर पर कचरा पृथक्करण के लिए “लीड फैसिलिटेटर” नियुक्त किया और कहा कि हर नागरिक को नियमों के पालन में शामिल करना उनका वैधानिक दायित्व है।
जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के बुनियादी ढांचे का ऑडिट करें, कमियों की पहचान करें और समयबद्ध तरीके से मुख्य सचिव को रिपोर्ट दें।
उन्हें नगर निकायों और ग्राम पंचायतों में कचरा प्रबंधन की निगरानी का अधिकार भी दिया गया है।
अदालत ने कहा कि सभी स्थानीय निकाय:
- 100% अनुपालन के लिए समय-सीमा तय कर सार्वजनिक करें
- प्रगति की फोटोग्राफिक साक्ष्य जिलाधिकारी को ई-मेल करें
- सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स को नियमों की सूचना देकर 31 मार्च तक पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें
प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को चार-स्तरीय पृथक्करण (गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष श्रेणी) के लिए आवश्यक ढांचे की पहचान कर शीघ्र स्थापना सुनिश्चित करने को कहा गया।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिया गया कि SWM नियमों को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
साथ ही, नियमों का सार सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की स्थानीय भाषाओं में अनुवादित किया जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अब उल्लंघन को केवल प्रशासनिक चूक नहीं माना जाएगा।
तीन-स्तरीय प्रवर्तन व्यवस्था लागू होगी:
- प्रारंभिक उल्लंघन पर तुरंत जुर्माना
- लगातार उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
- पर्यावरण कानूनों के तहत आपराधिक मुकदमा, जिसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारी भी शामिल होंगे
अदालत ने कहा:
“ठोस अपशिष्ट के कुप्रबंधन से जुड़े अपराध दंडनीय हैं।”
साथ ही, रियल-टाइम उल्लंघनों से निपटने के लिए मोबाइल अदालतों की संभावना पर भी विचार चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और अधिकरणों के अध्यक्षों से कहा कि 1 अप्रैल 2026 से सभी न्यायिक संस्थानों में SWM नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
स्थानीय निकायों को जन-जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया, जिसमें कचरा कम करना, घर में कम्पोस्टिंग, सैनिटरी कचरे की सुरक्षित पैकेजिंग और पृथक कचरा देने के बारे में लोगों को शिक्षित किया जाए।
अदालत ने कहा कि ये निर्देश 1 अप्रैल 2026 से नियम लागू होने से पहले आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के लिए जारी किए गए हैं।

