सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत भवन ढहाने का आदेश रद्द किया; कहा — सार्वजनिक धन व्यर्थ नहीं जाना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के फिरसह चुर्राह गांव में बने पंचायत भवन को तोड़ने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकारी धन से निर्मित सार्वजनिक संरचनाओं को अनावश्यक रूप से ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हाईकोर्ट के 4 मार्च 2024 के आदेश को संशोधित किया। हाईकोर्ट ने यह आदेश उस जनहित याचिका पर पारित किया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि पंचायत भवन का निर्माण गांव की पारंपरिक मार्ग (पैदल रास्ते) में बाधा बन रहा है।

पीठ ने कहा,
“आख़िर यह सरकारी पैसा है, जिसे पंचायत भवन के निर्माण पर खर्च किया गया है और वह भी ग्राम सभा की ज़मीन पर… सार्वजनिक धन व्यर्थ नहीं जाना चाहिए।”

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि ग्रामीणों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है और संबंधित भवन ग्राम सभा की भूमि पर ही निर्मित है।

इन तथ्यों पर विचार करते हुए अदालत ने भवन गिराने से इंकार कर दिया और विवाद के समाधान के लिए निर्देश जारी किए।

सुप्रीम कोर्ट ने जिला कलेक्टर को निर्देश दिया कि वह स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करें, यह देखें कि रास्ता उपलब्ध है या नहीं और मार्ग से जुड़े विवाद का समाधान स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित करें।

अदालत ने स्पष्ट किया कि पंचायत भवन को नहीं गिराया जा सकता और रास्ते के विवाद का निपटारा प्रशासन द्वारा किया जाए।

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गांव के निवासी अंग्रेज़ सिंह ने 2022 में हाईकोर्ट में PIL दायर की थी, जिसमें दावा किया गया कि प्लॉट नंबर 254 राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक मार्ग के रूप में दर्ज है और भवन निर्माण अतिक्रमण है।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के साथ पंचायत भवन यथावत रहेगा, बशर्ते कि जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि ग्रामीणों के आवागमन के लिए रास्ता सुचारू रूप से उपलब्ध हो।

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