सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया और मामले को इसी मुद्दे से संबंधित पहले से लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा, “नोटिस जारी किया जाता है, जवाब 23 मार्च तक दाखिल किया जाए।”
याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन नियम, 2025 के तहत ऐसी स्पष्ट और संतुलित छूट प्रदान करे, जो पत्रकारिता, संपादकीय कार्य, खोजी रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए व्यक्तिगत डेटा के उपयोग को सुरक्षित बनाए।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि कानून में पत्रकारों के स्रोतों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान शामिल किए जाने चाहिए।
इससे पहले 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इसी कानून के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर विचार करने के लिए सहमति दी थी। हालांकि उस समय अदालत ने इन प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
अदालत ने तब स्पष्ट किया था कि बिना विस्तृत सुनवाई के संसद द्वारा लागू किए गए कानून की व्यवस्था को अंतरिम आदेश के जरिए रोका नहीं जा सकता।
याचिकाओं में विशेष रूप से “डेटा फिड्यूशियरी” से जुड़े प्रावधानों पर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार को किसी भी डेटा फिड्यूशियरी से अपने विवेक से डेटा मांगने की शक्ति मिलती है, जिससे निजता और डेटा सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र सरकार को इस मामले में अपना पक्ष दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होने की संभावना है।

