सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन के विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका में 14 खामियां पाई हैं। इस याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है।
सोमवार को याचिका की जांच के दौरान रजिस्ट्री ने कई दस्तावेजों के अस्पष्ट होने, कुछ पन्नों के गायब होने और कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी जैसी खामियां बताईं।
रजिस्ट्री ने याचिका दाखिल करने वाले वकील से कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट कॉपी जमा करने को कहा है। खड़गे भी इस याचिका में याचिकाकर्ता हैं। इसके अलावा याचिका के कुछ पन्ने पढ़ने योग्य नहीं पाए गए, जबकि कुछ पन्ने संलग्न ही नहीं थे।
मतदाता सूची में बदलाव की स्वतंत्र जांच कराने की मांग
विपक्षी दलों ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग के कामकाज और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है। इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी शामिल करने की मांग की गई है।
प्रस्तावित समिति को निश्चित समयसीमा के भीतर SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और उसमें किए गए अन्य बदलावों की स्वतंत्र जांच करने की जिम्मेदारी देने का अनुरोध किया गया है।
इसके अलावा विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस की विश्वसनीयता और SIR लागू करने की पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए भी समिति बनाने की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं ने SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। हालांकि, उन्होंने इस प्रक्रिया की कानूनी वैधता को चुनौती नहीं दी है।
विपक्ष ने यह सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश देने का अनुरोध किया है कि पंजाब और चुनाव होने वाले अन्य राज्यों की मतदाता सूचियों में सभी पात्र मतदाताओं के नाम शामिल रहें।
CEC ज्ञानेश कुमार के फैसलों और EVM व्यवस्था पर भी सवाल
INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एकतरफा फैसले लेने से रोकने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है।
याचिका में चुनाव आयोग के कामकाज, SIR के दौरान कथित मनमाने तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के इस्तेमाल तथा उनकी तैनाती से जुड़ी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।
विपक्षी नेताओं ने इन मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे विपक्षी नेता
याचिका दाखिल करने से पहले सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कई विपक्षी दलों के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। इस मार्च में हजारों समर्थक भी शामिल हुए।
याचिका दाखिल करने वाले नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, सीपीएम के एम. ए. बेबी, सीपीआई के डी. राजा, जेएमएम की महुआ माजी, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले और आईयूएमएल के ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।
विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात करने की भी कोशिश की थी, लेकिन मुलाकात की अनुमति नहीं मिली।
इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि अदालत में याचिका दाखिल करने का रास्ता बताया जाना एक सकारात्मक कदम है और विपक्ष इस रास्ते से अपनी बात आगे रख सकता है।
फिलहाल याचिका में दस्तावेजों और कोर्ट फीस से जुड़ी जिन 14 खामियों की पहचान की गई है, उन्हें दूर किया जाना बाकी है।

