सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें तिरुमला लड्डू विवाद को लेकर पोस्टर या सार्वजनिक बयानों के जरिए कथित रूप से भ्रामक जानकारी फैलाने वाले व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि इस मामले में पहले से ही आपराधिक मामला दर्ज है और जांच जारी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जब मामले की जांच चल रही है, तब इस स्तर पर अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
पीठ ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता या कोई अन्य व्यक्ति इस मामले से संबंधित कोई साक्ष्य या सामग्री रखना चाहता है, तो वह उसे जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है, ताकि जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सके।
दरअसल, तिरुमला लड्डू को लेकर उस समय विवाद खड़ा हुआ था जब प्रसाद के रूप में दिए जाने वाले लड्डुओं के निर्माण में कथित तौर पर पशु वसा के इस्तेमाल के आरोप सामने आए थे। इस मुद्दे ने देशभर में करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित किया था।
इससे पहले 4 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। उस समय अदालत ने कहा था कि यह कदम “करोड़ों लोगों की भावनाओं को शांत करने” के लिए उठाया गया है।
साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस विवाद के बहाने न्यायालय को “राजनीतिक अखाड़ा” नहीं बनाया जा सकता।
मामले में जांच जारी रहने को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ताजा याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को उपलब्ध सामग्री जांच एजेंसी को देने की सलाह दी।

