सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों से जवाब मांगा है, जिसमें मुकदमे की कार्यवाही के दौरान जब्त पशुओं की अभिरक्षा से संबंधित नियम की वैधता को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए नोटिस जारी किया और इसे इसी तरह के एक लंबित मामले के साथ जोड़ दिया।
याचिका में Prevention of Cruelty to Animals (Care and Maintenance of Case Property Animals) Rules, 2017 के नियम 3 को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह प्रावधान Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 के दायरे से बाहर है और विशेष रूप से अधिनियम की धारा 29 के विपरीत है।
धारा 29 के तहत अदालत को यह अधिकार है कि वह किसी व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने के बाद उसे पशुओं के स्वामित्व से वंचित कर सकती है। याचिका में तर्क दिया गया है कि विवादित नियम के तहत बिना दोषसिद्धि के ही पशुओं की जब्ती, स्थानांतरण या स्थायी रूप से स्वामित्व से वंचित करने जैसी कार्रवाई की अनुमति दी जाती है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि नियम 3 को अधिनियम के विपरीत बताते हुए असंवैधानिक घोषित किया जाए और इसे निरस्त किया जाए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह की पूर्व-दोषसिद्धि जब्ती संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 300A का उल्लंघन करती है। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 300A के अनुसार किसी व्यक्ति को विधि के अधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
पीठ ने मामले पर नोटिस जारी करते हुए केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। साथ ही, इस मुद्दे से जुड़ी पहले से लंबित याचिका के साथ इसे सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

