सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के एक दंगा मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह नोटिस चंडीगढ़ प्रशासन की उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें हाईकोर्ट द्वारा इन नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने के फैसले को चुनौती दी गई है।
चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका पर सुनवाई
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन की अपील पर विचार करते हुए यह निर्देश दिया। मामले की सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश अतिरिक्त सॉसोलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी. राजू ने अदालत में पक्ष रखा।
उन्होंने तर्क दिया कि यह गैर-कानूनी तरीके से भीड़ जुटाने और बल प्रयोग का मामला था, जिसके कारण संज्ञेय अपराध हुआ। उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा मामले को रद्द किए जाने के आदेश को पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण बताया। शीर्ष अदालत ने एएसजी की दलीलें सुनने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ-साथ ‘आप’ नेता हरपाल सिंह चीमा, गुरमीत सिंह, मीत हेयर, बलजिंदर कौर और अमन अरोड़ा सहित अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और हाईकोर्ट का फैसला
इससे पहले 21 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आरोप नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि मान या अन्य आरोपियों ने 2020 में बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रही भीड़ को भड़काया था।
वहीं, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि आप नेताओं के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 147 (बलवा), 149 (गैर-कानूनी समूह), 332 (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए चोट पहुंचाना) और 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला) के तहत दर्ज प्राथमिकी और आरोप पत्र को रद्द कर दिया था।
2020 के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
यह कानूनी विवाद 2020 में चंडीगढ़ में बिजली की दरों में वृद्धि के खिलाफ आम आदमी पार्टी के एक प्रदर्शन के दौरान दर्ज शिकायत से उत्पन्न हुआ था। यह एफआईआर महिला कांस्टेबल मनप्रीत कौर की शिकायत पर दर्ज की गई थी।
शिकायत के अनुसार, भगवंत मान सहित पार्टी के नेताओं ने लगभग 750 से 800 कार्यकर्ताओं को चंडीगढ़ के सेक्टर 2 स्थित पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के आवास की ओर बढ़ने के लिए उकसाया था। पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और पुलिस द्वारा वॉटर कैनन का इस्तेमाल किए जाने के बाद पथराव किया, जिससे कई पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई थीं।

