न्याय प्रणाली में डिजिटल क्रांति: सुप्रीम कोर्ट में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन, CJI करेंगे ई-कोर्ट्स फेज-III की शुरुआत

भारत की न्यायिक अवसंरचना को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी और न्याय विभाग संयुक्त रूप से ‘न्यायिक प्रक्रिया री-इंजीनियरिंग और डिजिटल परिवर्तन’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं।

यह सम्मेलन 11 और 12 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स के मल्टीपर्पज हॉल में आयोजित होगा। यह ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसका मुख्य उद्देश्य न्याय वितरण प्रणाली की दक्षता, पारदर्शिता और सुगमता को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का समावेश करना है।

सम्मेलन का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत करेंगे। उद्घाटन सत्र को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और ई-कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और जितिन प्रसाद भी संबोधित करेंगे।

इस उच्च स्तरीय मंच पर सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के साथ-साथ गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के वरिष्ठ अधिकारी डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे।

इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट के तीसरे चरण (Phase III) के तहत कई महत्वपूर्ण डिजिटल टूल का अनावरण होगा। ये पहल न्यायपालिका, वादियों और अन्य सरकारी विभागों के बीच समन्वय को सरल बनाने के लिए तैयार की गई हैं। प्रमुख लॉन्च में शामिल हैं:

  • ई-कोर्ट्स सर्विसेज मोबाइल ऐप (वर्जन 4.0): कानूनी पेशेवरों और आम जनता के लिए एक उन्नत इंटरफेस।
  • सिंगल साइन-ऑन (SSO) पोर्टल: विभिन्न न्यायिक डिजिटल सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाने के लिए एक एकीकृत पोर्टल।
  • इलेक्ट्रॉनिक समन डिलीवरी: ईमेल के माध्यम से समन भेजने की सुविधा, जो कागजी कार्रवाई को कम करेगी।
  • ई-प्रिजन एकीकरण: बेहतर समन्वय के लिए अदालती प्रक्रियाओं को सीधे जेल प्रणालियों से जोड़ने वाली व्यवस्था।
  • फेज-III द्विवार्षिक रिपोर्ट: परियोजना की प्रगति और भविष्य के रोडमैप की विस्तृत समीक्षा।
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यह सम्मेलन राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना पर आधारित है, जिसका लक्ष्य सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के माध्यम से व्यवस्था की बाधाओं को दूर करना है। डिजिटल टूल के लॉन्च के अलावा, विशेषज्ञ मौजूदा न्यायिक प्रक्रियाओं की ‘री-इंजीनियरिंग’ पर चर्चा करेंगे ताकि मामलों के निपटारे में तेजी आए और नागरिकों के लिए न्याय पाना और भी आसान हो सके।

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