सतलोक आश्रम हिंसा मामला: हाईकोर्ट ने 11 साल बाद संत रामपाल को दी नियमित जमानत, ‘भीड़ वाली मानसिकता’ न बढ़ाने की हिदायत

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सतलोक आश्रम के प्रमुख, 75 वर्षीय रामपाल को 2014 के बरवाला हिंसा मामले में नियमित जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने उनकी लंबी न्यायिक हिरासत और बढ़ती उम्र को आधार मानते हुए यह फैसला सुनाया। हालांकि, कोर्ट ने रामपाल को सख्त हिदायत दी है कि वे किसी भी तरह की ‘भीड़ वाली मानसिकता’ (mob mentality) को बढ़ावा न दें।

जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ ने 8 अप्रैल को यह आदेश पारित किया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने हिसार की एक अदालत द्वारा सितंबर 2025 में दिए गए उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें रामपाल की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

यह मामला नवंबर 2014 का है, जब हिसार जिले के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में भारी हंगामा और हिंसा हुई थी। आरोप था कि रामपाल और उनके 900 से अधिक अनुयायियों ने पुलिस की गिरफ्तारी का हिंसक विरोध किया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आश्रम में भारी संख्या में समर्थक मौजूद थे, जिनमें से कुछ सशस्त्र थे। आरोप यह भी था कि पुलिस को अंदर घुसने से रोकने के लिए महिलाओं और बच्चों को ‘मानव ढाल’ के रूप में इस्तेमाल किया गया। इस घटना के बाद रामपाल के खिलाफ हत्या के प्रयास, राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ने और यूएपीए (UAPA) जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला (FIR No. 428) दर्ज किया गया था।

सुनवाई के दौरान रामपाल के वकील ने पक्ष रखा कि वह 8 दिसंबर 2014 से जेल में हैं। बचाव पक्ष की मुख्य दलीलें इस प्रकार थीं:

  • रामपाल की उम्र अब 75 वर्ष हो चुकी है।
  • इस एफआईआर में नामजद लगभग 900 सह-आरोपियों में से अधिकांश को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
  • मुकदमे की कार्यवाही बहुत धीमी चल रही है; कुल 425 गवाहों में से अब तक केवल 58 की ही गवाही हो पाई है।
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दूसरी ओर, सरकारी वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं। सरकार का तर्क था कि रामपाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए जानबूझकर भीड़ जुटाई, जिसने पुलिस पर पथराव और गोलीबारी की।

आरोपों की गंभीरता और ‘त्वरित सुनवाई’ (speedy trial) के अधिकार के बीच संतुलन बनाते हुए हाईकोर्ट ने माना कि निकट भविष्य में मुकदमे के संपन्न होने की संभावना कम है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “आरोपी की 11 साल से अधिक की लंबी कैद, उनकी 75 वर्ष की आयु और इस तथ्य को देखते हुए कि अधिकांश गवाहों की जांच अभी बाकी है, यह आरोपी को नियमित जमानत पर रिहा करने के लिए एक उपयुक्त मामला है।”

जमानत देते समय खंडपीठ ने भविष्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने रामपाल को आदेश दिया कि वे किसी भी तरह की ‘भीड़ वाली मानसिकता’ को प्रोत्साहित न करें और ऐसे किसी भी समागम में शामिल होने से बचें जहां उनके अनुयायियों द्वारा कानून-व्यवस्था भंग करने या शांति भंग करने की आशंका हो।

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि रामपाल जमानत की शर्तों का उल्लंघन करते हैं या किसी को अपराध के लिए उकसाते पाए जाते हैं, तो राज्य सरकार उनकी जमानत रद्द करवाने के लिए कदम उठा सकती है।

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