राजस्थान के नदी घाटियों में संस्थागत विफलता और पर्यावरण के गंभीर क्षरण पर चिंता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता शामिल हैं, ने राज्य सरकार को एक उच्च स्तरीय “इंटीग्रेटेड को-ऑर्डिनेशन ग्रुप” और एक स्वतंत्र “रिवर कमीशन/रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी” गठित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने नदियों और जल निकायों के प्रदूषण, अवैध औद्योगिक कचरे के बहाव, नदी तटीय क्षेत्रों में अतिक्रमण और भूजल के अत्यधिक दोहन से निपटने के लिए कई बाध्यकारी निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही, लोक सेवकों और औद्योगिक संचालकों की भूमिका की गहन जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को निर्देश दिए हैं।
मामला और पृष्ठभूमि
यह मामला राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूनी नदी प्रणालियों में हुए गंभीर पर्यावरणीय नुकसान को लेकर दर्ज एक स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) याचिका और उससे जुड़ी सिविल अपीलों से संबंधित है। 21 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी की दूसरी स्टेटस रिपोर्ट, एसआईटी की पहली स्टेटस रिपोर्ट और राज्य भर में जारी पर्यावरणीय संकट को उजागर करने वाली समाचार पत्रों की रिपोर्टों की समीक्षा की थी।
प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर जल प्रदूषण, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) से बिना उपचारित औद्योगिक कचरे का अवैध बहाव, कृषि भूमि और वन्यजीव आवासों का नुकसान, तथा हाई फ्लड लाइन और बफर जोन तय करने में कमियां पाई गईं। इसके जवाब में, कोर्ट ने पूर्व में अंतरिम निर्देश जारी करते हुए राज्य सरकार से गंभीर आपराधिक धाराओं को लागू न करने पर स्पष्टीकरण मांगा था, तनावाड़ा और डोली के पास पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील भूमि को वन विभाग को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे और मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।
राज्य और एसआईटी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट
21 जुलाई के आदेश के अनुपालन में, राजस्थान सरकार और एसआईटी ने अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की:
- एसआईटी की जांच: एसआईटी ने जोधपुर, पाली और बालोतरा जिलों में नदी प्रदूषण से संबंधित 16 आपराधिक मामलों की समीक्षा की और चार नई प्राथमिकी दर्ज कीं। जहां प्राथमिक साक्ष्य मिले, वहां भारतीय न्याय संहिता, 2023 (धारा 272, 326(a), 326(c) सहित) और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धाराएं जोड़ी गईं। गिरफ्तारियां की गईं और स्काडा (SCADA) इनफ्लो/आउटफ्लो डेटा विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज और क्विक रिस्पांस टीमों का उपयोग करके निगरानी बढ़ाई गई। एसआईटी ने बताया कि सीईटीपी अधिकारियों और औद्योगिक इकाइयों के बीच उपचार प्रक्रिया को दरकिनार कर कचरा बहाने की मिलीभगत के प्राथमिक साक्ष्य मिले हैं।
- राज्य सरकार की अनुपालन रिपोर्ट:
- तनावाड़ा तालाब (जोजरी नदी): तनावाड़ा में गुलाबी रंग के पानी की रिपोर्ट पर आईआईटी जोधपुर के प्रारंभिक अध्ययन से संकेत मिला कि नमकीन टेक्सटाइल अपशिष्ट और जैविक संदूषण के साथ वाष्पीकरण इसका कारण हो सकता है। संस्थान ने 10-12 सप्ताह के विस्तृत अध्ययन की सिफारिश की है।
- सांगानेर-द्रव्यवती-नेवटा क्षेत्र: सांगानेर में 1,767 टेक्सटाइल इकाइयों में से 892 इकाइयां 12.3 एमएलडी ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सीईटीपी से जुड़ी हैं, जबकि 875 इकाइयां बाहर हैं। जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 33A के तहत 814 इकाइयों के खिलाफ बंदी के निर्देश जारी किए गए, 65 इकाइयां सील की गईं, और 37 अवैध इकाइयों तथा सीईटीपी प्रबंधन के खिलाफ मुकदमे शुरू किए गए।
- मोरेल बांध: राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) के निरीक्षण में बांध में एल्गल ब्लूम और जलकुंभी पाई गई, हालांकि कोई दुर्गंध या जीव-जंतुओं की मृत्यु नहीं देखी गई। लैब टेस्ट में बीओडी (BOD) और सीओडी (COD) की उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि भारी धातुएं सीमा के भीतर पाई गईं।
- हानिकारक स्लज का निस्तारण: अंबे वैली एचआरटीएस स्थल से 1,105.08 मीट्रिक टन हानिकारक स्लज को अधिकृत कॉमन ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (CTDF) में निस्तारित किया गया। खेड़ एचआरटीएस स्थल पर नौ में से चार तालाबों को ध्वस्त कर 332 मीट्रिक टन स्लज हटाया गया। नेहदा बांध के इन-सिटू उपचार के लिए आईआईटी मद्रास की तकनीकी सहायता ली गई है।
- व्हाइट कैटेगरी उद्योग: व्हाइट कैटेगरी की औद्योगिक इकाइयों की ओर से पेश वकील ने प्रस्तुत किया कि भौतिक निरीक्षण के बाद सील हटाने और संचालन फिर से शुरू करने के लिए आवेदन दिए गए हैं, जिन पर श्रमिकों की आजीविका की रक्षा के लिए शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां और विश्लेषण
मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि उपलब्ध सामग्री “नदी तंत्र के गंभीर क्षरण, जल निकायों के प्रदूषण, औद्योगिक कचरे के अवैध बहाव, भूमि उपयोग विनियमन में कमियों, वन्यजीव आवासों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों और प्रभावित पारिस्थितिकी के पुनरुद्धार की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।”
एसआईटी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पीठ ने कहा कि गंभीर धाराओं को जोड़ने और गिरफ्तारी के कदम मुख्य रूप से सुनवाई की तारीख नजदीक आने पर ही उठाए गए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि एसआईटी ने इस अदालत द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी के तहत महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि गंभीर अपराधों को जोड़ने और गिरफ्तारियों के कदम केवल तब उठाए गए जब मामला इस अदालत द्वारा तय की गई सुनवाई की तारीख के पास पहुंच रहा था। यह एसआईटी की कार्रवाई की नीयत पर सवाल खड़े करता है।”
जांच को निष्पक्ष बनाने पर जोर देते हुए कोर्ट ने कहा कि “संपूर्ण साजिश का पूरी तरह से पर्दाफाश करने के लिए व्यापक जांच आवश्यक है, इसलिए एसआईटी द्वारा एक अधिक गहन जांच की जानी चाहिए।” जजों ने निर्देश दिया कि “जांच केवल अनुपचारित औद्योगिक कचरे के अवैध बहाव के तात्कालिक कृत्यों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि घटनाओं की पूरी श्रृंखला, निर्णय लेने की प्रक्रियाओं, इस्तेमाल किए गए वित्तीय और संस्थागत तंत्रों और सभी व्यक्तियों की संलिप्तता की पहचान करके मामले की जड़ तक जानी चाहिए—चाहे वे निजी व्यक्ति हों, औद्योगिक संस्थाएं हों या सार्वजनिक अधिकारी।”
कोर्ट ने काकणी में प्रस्तावित रीको (RIICO) औद्योगिक क्षेत्र (जहां 12.805 हेक्टेयर भूमि लूनी नदी के पास हाई फ्लड एरिया में आती है) और अंबे वैली इंडस्ट्रियल पार्क में भूमि उपयोग परिवर्तन, मास्टर प्लान के उल्लंघन और सरकारी रिकॉर्ड गायब होने पर गहरी चिंता व्यक्त की। भूजल संरक्षण पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि “जिन क्षेत्रों को भूजल की उपलब्धता के संदर्भ में डार्क जोन (अत्यधिक दोहन वाले क्षेत्र) के रूप में चिह्नित किया गया है, वहां अब से ऐसे किसी भी उद्योग को अनुमति नहीं दी जाएगी जो अत्यधिक जल-गहन हैं।”
इसके अलावा, प्रशासनिक जवाबदेही पर बोर्ड को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि “राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में आरएसपीसीबी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई, यदि कोई हो, के बारे में पूरी तरह से चुप्पी साधी गई है।”
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
पर्यावरण प्रशासन में सुधार और नदियों के संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित प्रमुख निर्देश जारी किए:
- इंटीग्रेटेड को-ऑर्डिनेशन ग्रुप: राज्य सरकार सात दिनों के भीतर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक “इंटीग्रेटेड को-ऑर्डिनेशन ग्रुप” का गठन करे, जिसमें पर्यावरण, वन, जल संसाधन, नगर विकास, राजस्व और आरएसपीसीबी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हों।
- व्यापक समाधान योजना: यह समन्वय समूह ओवरसाइट कमेटी के परामर्श से तीन सप्ताह के भीतर एक विस्तृत समाधान योजना (Comprehensive Resolution Plan) प्रस्तुत करे, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य, समय सीमा और डिजिटल तकनीकों (जीआईएस, सैटेलाइट मैपिंग, एआई सर्विलांस) का समावेश हो।
- रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी: राज्य में नदियों के संरक्षण और हाई फ्लड लाइन के निर्धारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र ‘रिवर कमीशन/रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी’ की स्थापना की जाए।
- नदी गलियारों में निर्माण पर रोक: जब तक नदियों की हाई फ्लड लाइन और बफर जोन का वैज्ञानिक निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक नदी गलियारों में नए औद्योगिक, व्यावसायिक या आवासीय विकास की कोई अनुमति न दी जाए।
- विकेंद्रीकृत अपशिष्ट उपचार: 100 किलो लीटर प्रति दिन (KLD) या उससे अधिक कचरा उत्पन्न करने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए कैप्टिव एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) को बढ़ावा दिया जाए और मौजूदा सीईटीपी की क्षमता में सुधार किया जाए।
- एसआईटी जांच और लोक सेवक: एसआईटी बिना किसी दबाव या पक्षपात के अपनी जांच तेज करे और औद्योगिक मालिकों, सीईटीपी पदाधिकारियों तथा लोक सेवकों की भूमिका की गहनता से जांच करे।
- व्हाइट कैटेगरी आवेदनों का निस्तारण: ओवरसाइट कमेटी व्हाइट कैटेगरी उद्योगों के लंबित आवेदनों पर सात दिनों के भीतर निर्णय ले।
- क्यूआर कोड आधारित शिकायत तंत्र: पर्यावरण उल्लंघनों की गोपनीय रिपोर्टिंग के लिए आरएसपीसीबी वेबसाइटों, औद्योगिक क्षेत्रों, ग्राम पंचायतों और सार्वजनिक कार्यालयों में क्यूआर कोड आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म स्थापित किया जाए। साथ ही शिकायतकर्ताओं के लिए प्रोत्साहन योजना लागू की जाए।
- आरएसपीसीबी अधिकारियों की जवाबदेही: आरएसपीसीबी के दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई या प्रस्तावित कार्रवाई का ब्योरा तीन दिनों के भीतर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 तय की है, जिसमें इंटीग्रेटेड को-ऑर्डिनेशन ग्रुप द्वारा पेश की जाने वाली व्यापक समाधान योजना की समीक्षा की जाएगी।
मामले का विवरण
मामले का शीर्षक: इन री: 2 मिलियन लाइव्स एट रिस्क, कंटामिनेशन इन जोजरी रिवर, राजस्थान विद सिविल अपील संख्या 5517-5519/2022, सिविल अपील संख्या 8748/2022, सिविल अपील संख्या 9057-9058/2022, सिविल अपील संख्या 9010-9011/2022
वाद संख्या: सुओ मोटो रिट पिटीशन (सिविल) संख्या 8/2025
पीठ: जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता
निर्णय की तिथि: 07 अगस्त 2026

