क्या आधार अपराध में बरी होने से मनी लॉन्ड्रिंग केस स्वतः खत्म हो जाएगा? सुप्रीम कोर्ट करेगा बड़ी कानूनी बहस की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह तय करने पर सहमति जताई कि क्या यदि किसी आरोपी को आधार अपराध (predicate offence) में बरी कर दिया जाए तो उसके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं चला सकता। अदालत ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न है जिससे देशभर के सैकड़ों मामलों पर असर पड़ेगा।

न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिनमें आरोपियों ने तर्क दिया है कि उन्हें यदि आधार अपराध में बरी कर दिया गया है, तो मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध नहीं बनता क्योंकि ‘अपराध की आय’ (proceeds of crime) ही नहीं बचती।

ध्यान रहे, मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) के तहत जांच तभी शुरू हो सकती है जब कोई ‘निर्धारित अपराध’ (scheduled/predicate offence) हो जिससे अवैध धन उत्पन्न हुआ हो।

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बताया कि कई मामलों में राज्यों की पुलिस प्रभावशाली आरोपियों को लाभ पहुंचाने के लिए ढीला रवैया अपनाती है और जब उन्हें आधार अपराध में बरी कर दिया जाता है तो ईडी मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में अभियोजन नहीं कर पाती।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 के विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत सरकार के फैसले की अलग-अलग व्याख्या की जा रही है, जिससे एजेंसी को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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पीठ ने सवाल उठाया कि क्या ईडी का पूरा मामला आधार अपराध पर निर्भर होना चाहिए? “हर मामला अपने तथ्यों पर आधारित होता है, ईडी को predicate offence का बचाव नहीं करना होता। हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि एक मामले में बरी होने से ईडी की पूरी कार्यवाही कैसे खत्म हो सकती है,” अदालत ने कहा।

न्यायालय ने यह भी जोड़ा कि “अगर ईडी के हाथ बांध दिए गए तो वह मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आर्थिक अपराधों में कैसे कार्रवाई करेगी? इससे कानून के उद्देश्य की ही हार होगी।”

पीठ ने दो पुराने फैसलों पर भी सवाल उठाए:

  • विजय मदनलाल चौधरी (2022): जिसमें कहा गया था कि यदि predicate offence नहीं है तो PMLA की कार्यवाही नहीं चल सकती।
  • पावना डिब्बूर बनाम ईडी (2023): जिसमें कहा गया कि आरोपी को निर्धारित अपराध में नामजद होना आवश्यक नहीं है, तब भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल सकता है।
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न्यायमूर्ति सुंद्रेश ने कहा कि “कई गांठें हैं जिन्हें खोलना होगा” और इन निर्णयों की वैधता की जांच की जाएगी।

शीर्ष अदालत अप्रैल में इस व्यापक कानूनी प्रश्न पर सभी पक्षों की दलीलें सुनेगी। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजा जाएगा क्योंकि 2022 का निर्णय तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिया गया था।

कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब ईडी को व्यावहारिक कठिनाई हो रही है तो उसने अभी तक उस फैसले की समीक्षा याचिका क्यों नहीं दायर की? इस पर एएसजी राजू ने जवाब दिया कि चूंकि 2022 का फैसला एजेंसी के पक्ष में था, इसलिए एजेंसी ने पुनर्विचार याचिका नहीं डाली, जबकि अन्य पक्षों की कई याचिकाएं लंबित हैं।

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