क्या प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक ‘विधिक व्यक्ति’ है? सुप्रीम कोर्ट ने केरल और तमिलनाडु सरकार की याचिकाओं पर जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न पर सुनवाई करने के लिए सहमति व्यक्त की है। शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि क्या प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसी संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ‘विधिक व्यक्ति’ (Juristic Person) का दर्जा मांगते हुए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकती है या नहीं।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने केरल और तमिलनाडु सरकारों द्वारा दायर अपीलों पर केंद्रीय एजेंसी को नोटिस जारी किया है। ये राज्य सरकारें केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे रही हैं, जिसमें हाईकोर्ट ने ED को एक ‘विधिक व्यक्ति’ मानते हुए रिट याचिका दायर करने का अधिकार (Locus Standi) प्रदान किया था।

क्या है पूरा मामला?

अदालत के सामने मुख्य कानूनी सवाल यह है कि क्या ED, जो कि एक सरकारी एजेंसी है, “जuristic person” या विधिक व्यक्ति की परिभाषा के अंतर्गत आती है। कानून की नजर में विधिक व्यक्ति वह गैर-मानवीय इकाई होती है जिसे एक इंसान की तरह अधिकार और कर्तव्य प्राप्त होते हैं। सुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच करेगा कि क्या ऐसी एजेंसी अपने अधिकारों के प्रवर्तन के लिए अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।

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केरल सोना तस्करी मामले से जुड़ा है विवाद

इस कानूनी लड़ाई की जड़ें 2020 के चर्चित सोना तस्करी मामले से जुड़ी हैं, जो राजनयिक चैनलों के माध्यम से किया गया था। विवाद तब गहरा गया जब केरल सरकार ने 7 मई, 2021 को एक अधिसूचना जारी कर ED अधिकारियों के खिलाफ न्यायिक जांच का आदेश दिया था।

राज्य सरकार ने कमीशन ऑफ इंक्वायरी एक्ट, 1952 के तहत हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस वी.के. मोहनन को इस जांच आयोग का प्रमुख नियुक्त किया था। आयोग को उन गंभीर आरोपों की जांच करने का काम सौंपा गया था कि ED अधिकारियों ने आरोपी स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर को मुख्यमंत्री सहित राज्य के राजनीतिक नेताओं को तस्करी मामले में फंसाने के लिए मजबूर किया था। यह जांच सुरेश के कथित ऑडियो क्लिप और नायर द्वारा लिखे गए एक पत्र के आधार पर शुरू की गई थी।

हाईकोर्ट में क्या हुआ था?

ED के उप निदेशक ने राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसी के खिलाफ जांच का आदेश देने के अधिकार को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट का रुख किया था।

11 अगस्त, 2021 को हाईकोर्ट की एकल पीठ (Single Bench) ने यह मानते हुए कि ED के पास याचिका दायर करने का अधिकार है, राज्य सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी थी। केरल सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की और तर्क दिया कि ED की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

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हालांकि, पिछले साल 26 सितंबर को केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ (Division Bench) ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि अपील में कोई दम नहीं है और एकल पीठ ने ED की याचिका पर सुनवाई करने और जांच पर रोक लगाने में कोई गलती नहीं की है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है।

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