सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती (प्रकाश पर्व) पर राष्ट्रीय राजपत्रित अवकाश घोषित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में केंद्र सरकार को देश में सार्वजनिक या राजपत्रित अवकाश घोषित करने के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा द्वारा दायर इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “खारिज की जाती है। विस्तृत आदेश बाद में आएगा।”
सार्वजनिक अवकाश नीति में स्पष्टता की मांग
याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि वर्तमान में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के लिए कोई मानक नीति मौजूद नहीं है। सिंह ने तर्क दिया कि इस बात पर “कुछ निश्चितता” होनी चाहिए कि किन मानदंडों के आधार पर सार्वजनिक अवकाश तय किए जाते हैं।
याचिका में विशेष रूप से केंद्र को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व को पूरे भारत में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए। इसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि ऐसे अवकाश उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अनिवार्य रूप से लागू होने चाहिए जहां सिख आबादी महत्वपूर्ण संख्या में है या जो क्षेत्र गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन और गतिविधियों से ऐतिहासिक रूप से जुड़े हुए हैं।
“राजनीतिक इच्छाशक्ति” और तुष्टिकरण पर उठाए सवाल
अपनी कानूनी चुनौती में ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा ने अवकाश घोषित करने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों की कमी को रेखांकित किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि किसी औपचारिक ढांचे के अभाव में, कार्यपालिका अक्सर अपनी “सनक और कल्पनाओं” के आधार पर छुट्टियां घोषित करती है।
याचिकाकर्ता ने आगे तर्क दिया कि ये निर्णय कभी-कभी सरकार में बैठे “राजनीतिक समूहों” द्वारा जनता के एक विशेष वर्ग के “तुष्टिकरण के राजनीतिक उद्देश्य” को पूरा करने के लिए लिए जाते हैं। न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए संगठन का लक्ष्य इस प्रक्रिया को अधिक संरचित और वस्तुनिष्ठ प्रणाली की ओर ले जाना था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं समझी, क्योंकि छुट्टियों का निर्धारण करना पारंपरिक रूप से कार्यपालिका के नीतिगत निर्णयों के अंतर्गत आता है।

