मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की पीठ अधिवक्ता पंकज सिन्हा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दिव्यांग वकीलों को बार काउंसिल में प्रभावी प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई थी।
BCI अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान विधिक ढांचे में बार काउंसिल में दिव्यांग अधिवक्ताओं के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य बार काउंसिलों की विभिन्न समितियों में उन्हें समायोजित कर प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने दिव्यांग वकीलों के लिए ₹1.25 लाख का नामांकन शुल्क “अत्यधिक और अव्यवहारिक” बताते हुए इसे चुनौती दी। मुख्य न्यायाधीश ने सुझाव दिया कि इस वर्ग के लिए शुल्क को प्रतीकात्मक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने ₹25,000 का सुझाव दिया, जिस पर जयसिंह ने कहा कि यह भी कई लोगों के लिए भारी हो सकता है।
इसके बाद BCI अध्यक्ष ने सहमति जताई कि दिव्यांग वकीलों के लिए नामांकन शुल्क को ₹15,000 तक कम किया जा सकता है।
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह छूट केवल दिव्यांग अधिवक्ताओं के लिए होगी और अन्य किसी भी श्रेणी के उम्मीदवारों को इसमें समानता नहीं दी जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि केवल समितियों में नामांकन ही स्थायी समाधान नहीं हो सकता, विशेषकर जब यह प्रक्रिया अधिकारियों के विवेक पर आधारित हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल में दिव्यांगों का संस्थागत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए विधिक संशोधन की आवश्यकता है।
हालांकि BCI अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संसद ने बार काउंसिल में दिव्यांगों के लिए कोई आरक्षण निर्धारित नहीं किया है। इस पर सीजेआई ने कहा, “हमें कहीं से तो शुरुआत करनी ही होगी। संभव है कि आने वाले समय में सार्वजनिक संस्थानों में ऐसे आरक्षण देखने को मिलें।”
कोर्ट के अन्य निर्देश:
- जहां चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, वहां दिव्यांग अधिवक्ताओं को समितियों में स्थान देकर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
- नामांकन शुल्क में छूट केवल दिव्यांग वर्ग तक सीमित रहेगी।
- BCI केंद्र सरकार से नामांकन और पंजीकरण शुल्क की समीक्षा हेतु तंत्र विकसित करने के लिए संपर्क कर सकता है।
- उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया गया कि जहां चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, वहां संबंधित याचिकाओं की सुनवाई न करें।
- कोर्ट ने दोहराया कि महिलाओं के लिए राज्य बार काउंसिल चुनावों में 30% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश अधिवक्ता समुदाय में समावेशन की दिशा में एक अहम कदम है। फिलहाल नामांकन शुल्क में राहत और समितियों में प्रतिनिधित्व से दिव्यांग वकीलों को भागीदारी का अवसर मिलेगा, लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट किया कि स्थायी सुधार के लिए विधायी परिवर्तन अनिवार्य होंगे, जिसकी पहल अब BCI को करनी होगी।

