सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि गोविंदघाट स्थित निजी हेलीपैड के बार-बार अस्थायी अधिग्रहण को चुनौती देने वाली डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की दो लंबित याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई कर दो माह के भीतर निर्णय दिया जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि इन याचिकाओं को 9 मार्च 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने नैनीताल स्थित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे मुख्य न्यायाधीश से निर्देश लेकर मामलों को उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें। पीठ ने आगामी चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए कहा कि यदि निर्धारित अवधि में याचिकाओं का निस्तारण नहीं होता है तो याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में पुनः आवेदन कर सकता है।
डेक्कन चार्टर्स 2011 से श्री हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर शटल सेवा संचालित कर रही है। कंपनी के पास चमोली जिले के गोविंदघाट हेलीपैड का मार्च 2027 तक वैध लीज है। कंपनी का आरोप है कि मई 2024 से राज्य प्रशासन यात्रा सीजन के नाम पर हेलीपैड का बार-बार अस्थायी अधिग्रहण कर रहा है।
याचिका के अनुसार पहला अधिग्रहण 23 मई 2024 को किया गया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। वह याचिका लंबित रहने के दौरान ही 27 जून 2025 को राज्य ने छह माह के लिए दूसरा अधिग्रहण आदेश जारी कर दिया।
कंपनी का आरोप है कि प्रशासन ने हेलीपैड के ताले तोड़कर कब्जा लिया और उसे पवन हंस लिमिटेड को वाणिज्यिक संचालन के लिए सौंप दिया, जबकि हेलीपैड का निर्माण और रखरखाव कंपनी द्वारा किया गया था।
याचिकाकर्ता ने इन कार्रवाइयों को “अवैध, निरंतर और असंवैधानिक” बताया है। उसका कहना है कि राज्य ने ‘एमिनेंट डोमेन’ की शक्ति का दुरुपयोग करते हुए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
कंपनी ने 23 मई 2024 और 27 जून 2025 के अधिग्रहण आदेशों को रद्द करने, हेलीपैड का कब्जा वापस दिलाने और नुकसान की भरपाई की मांग की है। उसने दावा किया है कि कथित अवैध अधिग्रहण अवधि के दौरान पवन हंस द्वारा किए गए प्रत्येक लैंडिंग पर ₹5,000 की दर से मुआवजा दिया जाए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि कई बार तात्कालिक सुनवाई का अनुरोध करने के बावजूद हाईकोर्ट में मामले का निर्णय नहीं हुआ।
शीर्ष अदालत ने कहा कि आगामी चारधाम यात्रा मई 2026 में शुरू होनी है, इसलिए मामले का शीघ्र निस्तारण आवश्यक है। कोर्ट ने हाईकोर्ट को दो माह के भीतर याचिकाओं पर निर्णय देने को कहा।
पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय में निर्णय नहीं होता है तो डेक्कन चार्टर्स सुप्रीम कोर्ट में लंबित कार्यवाही पुनर्जीवित कराने के लिए आवेदन कर सकती है।
मामले के गुण-दोष पर अभी उत्तराखंड हाईकोर्ट को विचार करना है।

