एक अहम घटनाक्रम में, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जस्टिस यशवंत वर्मा को उनके कार्यभार संभालने के बाद कोई भी न्यायिक कार्य न सौंपा जाए। यह निर्णय उस वक्त आया जब केंद्र सरकार ने आज उनके स्थानांतरण की घोषणा की, जो सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 24 मार्च की सिफारिश के बाद किया गया है।
यह निर्देश उस घटना के बाद आया है जिसमें जस्टिस वर्मा का नाम एक गंभीर मामले में सामने आया। दरअसल, 14 मार्च को उनके आवास पर लगी आग के बाद दमकलकर्मियों को बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिली। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा साझा किया गया, जिसमें जली हुई नकदी की बरामदगी दिखाई गई है।
इन घटनाओं के मद्देनज़र भारत के मुख्य न्यायाधीश ने 21 मार्च को एक आंतरिक जांच की शुरुआत की और तीन सदस्यीय समिति गठित की गई, जो जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की गहराई से जांच कर रही है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक विस्तृत रिपोर्ट भी सार्वजनिक की है, जिसमें जस्टिस वर्मा की ओर से इस घटना पर स्पष्टीकरण भी शामिल है।

जस्टिस यशवंत वर्मा का जन्म 1969 में हुआ था। उन्होंने मध्यप्रदेश की रीवा यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और 1992 में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए। अपने लंबे और प्रतिष्ठित करियर में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के विशेष परामर्शदाता और उत्तर प्रदेश राज्य के प्रमुख स्थायी अधिवक्ता जैसे पदों पर कार्य किया। 2013 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया और अक्टूबर 2014 में हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए। फरवरी 2017 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया और अक्टूबर 2021 में उनका स्थानांतरण दिल्ली हाईकोर्ट में हुआ।