सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा शाही ईदगाह विवाद पर सुनवाई मार्च 2025 तक टाली

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मथुरा में शाही ईदगाह की मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिका पर सुनवाई मार्च 2025 तक टाल दी। समिति इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे रही है, जिसमें कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। शीर्ष अदालत का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब वह पश्चिम बंगाल के स्कूलों में कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित एक अन्य बड़े मामले में व्यस्त थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार ने हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले से जुड़ी सौ से अधिक याचिकाओं पर निर्णय लेने में मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई करने में असमर्थता व्यक्त की। सीजेआई ने निर्देश दिया, “आज हम दूसरे मामले में हैं। याचिका को मार्च, 2025 में सूचीबद्ध करें।”

यह विवाद उस भूमि के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर केंद्रित है, जहां शाही ईदगाह मस्जिद स्थित है, जो भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मानी जाने वाली जगह से सटी हुई है। हिंदू वादियों का दावा है कि मुगल बादशाह औरंगजेब के समय की यह मस्जिद एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने अगस्त 2021 के फैसले में निर्धारित किया कि 15 अगस्त, 1947 तक साइट के धार्मिक चरित्र को दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य दोनों के माध्यम से स्थापित किया जाना चाहिए। यह निर्णय पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के सिद्धांतों के अनुरूप है, जो अयोध्या विवाद के उल्लेखनीय अपवाद के साथ पूजा स्थलों के धार्मिक चरित्र को भारत की स्वतंत्रता के समय की तरह संरक्षित करता है।

हिंदू पक्षकारों में से एक का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता बरुण सिन्हा ने तर्क दिया कि मस्जिद समिति को सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय इलाहाबाद हाईकोर्ट में अंतर-न्यायालय अपील करनी चाहिए थी। हालांकि, मस्जिद समिति का तर्क है कि हिंदू मुकदमे पूजा स्थल अधिनियम का उल्लंघन करते हैं और इसलिए कानूनी रूप से अस्थिर हैं।

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