सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को चुनाव आयोग द्वारा बिहार समेत कई राज्यों में विशेष रूप से मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई 13 जनवरी तक के लिए टाल दी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह स्पष्ट किया कि मामला गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन अब इस पर अगले मंगलवार को आगे की कार्यवाही होगी। मामले में चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी उस दिन अपनी दलीलें आगे बढ़ाएंगे।
चुनाव आयोग के इस कदम को चुनौती देने वाली याचिकाओं में कई महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं, जिनमें आयोग की शक्तियों की सीमा, नागरिकता और मताधिकार के अधिकार का दायरा शामिल है।
इससे पहले 6 जनवरी को हुई सुनवाई में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसे न केवल मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करने का अधिकार है, बल्कि यह उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी भी है कि कोई भी विदेशी नागरिक मतदाता सूची में शामिल न हो।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और 326 के तहत चुनाव आयोग को मिली शक्तियों की सीमाओं का उल्लंघन करती है और इससे कुछ वर्गों के मतदाता अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में जारी यह सुनवाई इस बात पर महत्वपूर्ण स्पष्टता ला सकती है कि चुनाव आयोग मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के संदर्भ में किन हदों तक कार्य कर सकता है और यह प्रक्रिया भारतीय संविधान में निहित नागरिकता और मताधिकार के अधिकारों के साथ किस प्रकार संतुलन में लाई जा सकती है।

