सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी को गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में दी गई अंतरिम ज़मानत को नियमित कर दिया। अब्बास अंसारी, दिवंगत गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के बेटे हैं और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के विधायक हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता निज़ाम पाशा की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।
अब्बास अंसारी और अन्य के खिलाफ 31 अगस्त 2024 को चित्रकूट ज़िले के कोतवाली कर्वी थाने में उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। उन पर रंगदारी वसूलने और मारपीट के आरोप लगे थे। इस मामले में नवनीत सचान, नियाज़ अंसारी, फ़राज़ ख़ान और शहबाज़ आलम ख़ान भी सह-आरोपी हैं।
अब्बास को 4 नवंबर 2022 से अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में रखा गया था और 6 सितंबर 2024 को गैंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ़्तार किया गया था।
मार्च 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें छह हफ्तों की अंतरिम ज़मानत दी थी, क्योंकि वे अन्य सभी मामलों में पहले ही ज़मानत पा चुके थे। हालांकि, 18 दिसंबर 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट केस में उनकी ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी।
मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम ज़मानत को नियमित कर दिया, जिससे अब्बास अंसारी की ज़मानत पक्की हो गई है। पहले कोर्ट ने उनके लिए यह शर्त भी लगाई थी कि वे जांच अधिकारी की अनुमति के बिना लखनऊ नहीं छोड़ सकते। बाद में कुछ शर्तों में ढील दी गई थी।
मार्च 2025 के आदेश के चलते ही उन्हें कासगंज जेल से रिहाई मिली थी।
अब्बास अंसारी को मिली राहत के बावजूद गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामला जारी रहेगा और सह-आरोपियों की जांच भी चलती रहेगी।
अब्बास अंसारी, जो मुख्तार अंसारी के राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाते हैं, अभी भी क़ानूनी जांच के घेरे में हैं, हालांकि ज़मानत के बाद उन्हें कुछ राहत जरूर मिली है।

