“खेल के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते”: सुप्रीम कोर्ट का बिहार सरकार को 2019 नियमों के तहत सहायक अभियंता भर्ती पूरी करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा शुरू की गई सहायक अभियंताओं की भर्ती प्रक्रिया में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “खेल शुरू होने के बाद खेल के नियम नहीं बदले जा सकते” (Rules of the game cannot be changed once the game has begun)।

शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों में किए गए बदलाव को सही ठहराया गया था। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि वह बिना किसी संशोधन के, मूल 2019 नियमावली के आधार पर ही भर्ती प्रक्रिया को दो महीने के भीतर पूरा करे।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में सहायक अभियंताओं (सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल) की नियुक्ति से जुड़ा है। इसके लिए वर्ष 2019 में विज्ञापन जारी किए गए थे। उस समय लागू ‘बिहार इंजीनियरिंग सेवा वर्ग-II भर्ती नियमावली, 2019’ के अनुसार, उम्मीदवारों का चयन केवल लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर होना था।

मार्च 2022 में लिखित परीक्षा आयोजित की गई और जून-जुलाई 2022 में आयोग ने अनंतिम मेधा सूची (Provisional Merit List) भी जारी कर दी। उम्मीदवारों को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया जा चुका था।

विवाद तब खड़ा हुआ जब 9 नवंबर, 2022 को, यानी मेधा सूची जारी होने के बाद, राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन कर दिया। इस संशोधन (2022 नियमावली) के तहत:

  1. लिखित परीक्षा के अंकों का वेटेज (भार) घटाकर 75 अंक कर दिया गया।
  2. संविदा (Contract) पर कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए कार्य अनुभव के आधार पर अधिकतम 25 अतिरिक्त अंक जोड़ दिए गए।
  3. यह बदलाव पिछली तारीख (6 मार्च, 2019) से लागू किया गया।
READ ALSO  दस्तावेज़ की स्वीकार्यता या प्रासंगिकता तय करने वाला आदेश एक अंतरिम आदेश है, इसलिए पुनरीक्षण पर रोक: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

इस बदलाव से जो उम्मीदवार लिखित परीक्षा के आधार पर चयनित हो चुके थे, उनकी मेरिट प्रभावित हो रही थी। उन्होंने इसे पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ताओं (अभय कुमार पटेल व अन्य) की दलीलों को स्वीकार करते हुए माना कि चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में नियमों को पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospectively) से लागू करना गलत है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा:

“भर्ती के लिए विज्ञापन जारी होने के साथ ही प्रक्रिया शुरू हो जाती है। एक बार जब लिखित परीक्षा हो चुकी हो और परिणाम घोषित होने की कगार पर हो, तब चयन के मानदंडों में बदलाव करना उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय है जिन्होंने पुरानी शर्तों पर परीक्षा दी थी।”

READ ALSO  गिरफ्तारी के खिलाफ सीएम केजरीवाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को नोटिस जारी किया

कोर्ट ने माना कि सरकार के पास नियम बनाने की शक्ति है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी चल रही प्रक्रिया को मनमाने ढंग से बाधित करने के लिए नहीं किया जा सकता।

कोर्ट के प्रमुख निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का निपटारा करते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:

  1. पुरानी नियमावली से भर्ती: बिहार सरकार और BPSC को निर्देश दिया गया है कि वे 2019 के मूल नियमों का पालन करें। इसका अर्थ है कि चयन केवल लिखित परीक्षा के अंकों के आधार पर होगा।
  2. संशोधन अमान्य: इस विशिष्ट भर्ती प्रक्रिया के लिए 2022 में किए गए संशोधन (संविदा कर्मियों को अतिरिक्त अंक) को लागू नहीं किया जाएगा।
  3. समय सीमा: जून/जुलाई 2022 में प्रकाशित मेधा सूची के आधार पर नियुक्तियों को दो महीने के भीतर अंतिम रूप दिया जाए।
  4. मौजूदा नियुक्तियों पर प्रभाव: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने संशोधित नियमों के आधार पर कुछ नियुक्तियां कर ली हैं, तो उन्हें कानूनन हटाया जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी छूट दी है कि यदि राज्य सरकार चाहे तो उन हटाए जाने वाले कर्मचारियों को उपलब्ध रिक्तियों या नए पद सृजित करके समायोजित कर सकती है, लेकिन इससे मूल मेरिट लिस्ट वाले उम्मीदवारों के अधिकारों पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए।
READ ALSO  Hate Speeches in Haridwar: Supreme Court Says “We Will Look Into It”

यह फैसला उन सभी सरकारी भर्तियों के लिए एक नजीर (precedent) है, जहां विज्ञापन निकलने के बाद चयन प्रक्रिया के बीच में नियमों में बदलाव कर दिया जाता है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles