सुप्रीम कोर्ट ने भारती टेलीकॉम लिमिटेड (BTL) के अल्पसंख्यक (Minority) शेयरधारकों द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कंपनी द्वारा अपनी शेयर पूंजी को कम करने (Reduction of Share Capital) के निर्णय को सही ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनलिस्टेड (गैर-सूचीबद्ध) शेयरों के मूल्यांकन में ‘डिस्काउंट फॉर लैक ऑफ मार्केटेबिलिटी’ (DLOM) का उपयोग करना पूरी तरह से वैध है और यह अल्पसंख्यक शेयरधारकों के अधिकारों का हनन नहीं है।
यह निर्णय जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पन्नालाल भंसाली बनाम भारती टेलीकॉम लिमिटेड के मामले में सुनाया।
कानूनी विवाद: क्या माइनॉरिटी निवेशकों को जबरन बाहर निकाला जा सकता है?
मामले का मुख्य केंद्र कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 66 थी। अपीलकर्ताओं (अल्पसंख्यक निवेशकों) का आरोप था कि भारती टेलीकॉम ने उन्हें बेहद कम कीमत देकर कंपनी से बाहर निकालने की साजिश रची है। उन्होंने ₹196.80 प्रति शेयर के मूल्यांकन को ‘दिखावा’ करार दिया और दावा किया कि कंपनी ने शेयरों की कीमत कम दिखाने के लिए जानबूझकर DLOM पद्धति का गलत इस्तेमाल किया है।
मामले की पृष्ठभूमि
भारती टेलीकॉम (BTL) एक क्लोजली हेल्ड कंपनी है। 2018 में, कंपनी ने अपनी 1.09% हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्तिगत अल्पसंख्यक शेयरधारकों के शेयरों को रद्द करने का फैसला लिया। इसके लिए 99.90% बहुमत से एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया। हालांकि शुरुआत में कीमत कम थी, लेकिन नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के हस्तक्षेप के बाद इसे ₹196.80 प्रति शेयर तय किया गया। इस फैसले के खिलाफ कुछ शेयरधारकों ने पहले NCLAT और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
पक्षों के बीच मुख्य बहस
अपीलकर्ताओं के तर्क: वरिष्ठ अधिवक्ता श्री के. परमेश्वर ने दलील दी कि बोर्ड का नोटिस ‘भ्रामक’ (Tricky Notice) था। उन्होंने कहा कि नोटिस में यह गलत दावा किया गया कि शेयरधारकों ने खुद बाहर निकलने का विकल्प मांगा था। साथ ही, उन्होंने मूल्यांकन करने वाली एजेंसी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए क्योंकि वह कंपनी के आंतरिक ऑडिटर से जुड़ी हुई थी।
प्रतिवादी (BTL) के तर्क: वरिष्ठ अधिवक्ता श्री रामजी श्रीनिवासन और श्री श्याम दीवान ने कहा कि धारा 66 के तहत सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। उन्होंने दलील दी कि 2016 के ‘राइट्स इश्यू’ के कारण निवेशकों को उनकी मूल होल्डिंग की तुलना में अब बहुत अधिक लाभ मिल रहा है। कंपनी ने यह भी कहा कि शेयरों का मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय मानकों और भारतीय लेखा मानकों (Ind AS 113) के अनुसार किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का कानूनी विश्लेषण
1. ‘भ्रामक नोटिस’ के दावे पर कोर्ट का रुख: कोर्ट ने अपीलकर्ताओं के ‘Tricky Notice’ के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नोटिस में सभी आवश्यक जानकारियां दी गई थीं और कंपनी ने पारदर्शिता बरतते हुए मूल्यांकन रिपोर्ट को अपने पंजीकृत कार्यालय में निरीक्षण के लिए उपलब्ध रखा था।
2. DLOM पद्धति की वैधता: कोर्ट ने मूल्यांकन में इस्तेमाल किए गए ‘डिस्काउंट फॉर लैक ऑफ मार्केटेबिलिटी’ (DLOM) को सही ठहराते हुए कहा:
“तरलता (Liquidity) निवेश का एक अहम हिस्सा है और इसकी कमी मूल्य को कम करने वाला एक कारक है। DLOM इस सिद्धांत पर आधारित है कि जो संपत्ति आसानी से बेची जा सकती है, उसका मूल्य उस संपत्ति से अधिक होता है जिसे बेचने के लिए अधिक समय या प्रयास की आवश्यकता होती है।”
3. विशेषज्ञों का निर्णय सर्वोपरि: कोर्ट ने कहा कि चूंकि भारती टेलीकॉम के शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं थे, इसलिए उनका मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा तय किया गया है और कोर्ट इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। कोर्ट ने टिप्पणी की:
“मूल्यांकन एक ऐसा कार्य है जिसे विशेषज्ञों पर छोड़ देना ही बेहतर है, जैसा कि मिहिर एच. मफतलाल बनाम मफतलाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड मामले में पहले ही तय किया जा चुका है।”
अंतिम निर्णय: अपीलें खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई पक्षपात या बड़ी गलती नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि ₹196.80 की कीमत उचित है और यह किसी भी तरह से अल्पसंख्यक शेयरधारकों के प्रति भेदभावपूर्ण नहीं है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए अपीलकर्ताओं को “अनुभवी निवेशक” बताया जो केवल अधिक लाभ की चाह में इस प्रक्रिया को रोक रहे थे। अंततः, कोर्ट ने सभी अपीलों को खारिज कर दिया।
केस विवरण:
- केस का शीर्षक: पन्नालाल भंसाली बनाम भारती टेलीकॉम लिमिटेड और अन्य।
- अपील संख्या: सिविल अपील संख्या 7655/2025 (एवं अन्य संबंधित मामले)
- पीठ: जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन
- तारीख: 10 मार्च, 2026

