सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली सरकार के नए स्कूल फीस विनियमन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 2 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत को सूचित किया गया कि उच्च अधिकारियों के साथ एक बैठक हो चुकी है और मुद्दों के समाधान के लिए एक और बैठक आवश्यक है।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिंह और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू की दलील सुनने के बाद सुनवाई टालने पर सहमति जताई। राजू दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए और बताया कि संबंधित अधिकारियों के साथ एक बैठक हो चुकी है तथा एक और बैठक प्रस्तावित है।
यह याचिकाएं निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के संगठनों द्वारा दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 और इसके तहत बनाए गए नियमों को चुनौती देते हुए दायर की गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 19 जनवरी को दिल्ली सरकार से सवाल किया था कि जब शैक्षणिक सत्र पहले से ही चल रहा है, तो इस कानून को लागू करने का यह उपयुक्त समय कैसे हो सकता है। अदालत ने इसके संभावित प्रभावों और व्यवधानों पर चिंता जताई थी।
यह कानून निजी स्कूलों में फीस निर्धारण को लेकर कई सख्त प्रावधान लाता है। इसमें फीस के प्रकार, लेखा प्रथाएं, अतिरिक्त शुल्क पर रोक, और स्वीकृत राशि से अधिक वसूली पर प्रतिबंध जैसे स्पष्ट दिशा-निर्देश शामिल हैं। कानून कैपिटेशन फीस को भी सख्ती से प्रतिबंधित करता है।
वहीं, निजी स्कूलों का तर्क है कि यह कानून उनकी स्वायत्तता को बाधित करता है और अत्यधिक सरकारी नियंत्रण थोपता है, जिससे स्कूल संचालन प्रभावित होगा। दूसरी ओर, दिल्ली सरकार का कहना है कि यह अधिनियम पारदर्शिता बढ़ाने और मनमाने शुल्क वसूली को रोकने के लिए जरूरी है।
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 2 फरवरी को करेगा।

