सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि एक नॉन-सिग्नेटरी (गैर-हस्ताक्षरकर्ता) सब-कॉन्ट्रैक्टर, जिसका मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) के साथ कोई सीधा अनुबंध नहीं है, वह मुख्य नियोक्ता के खिलाफ आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) की कार्यवाही शुरू नहीं कर सकता। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश
