रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक अहम फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाय-बैक समझौतों और सुनिश्चित उच्च-रिटर्न योजनाओं वाले आवंटियों को “सट्टेबाज निवेशक” माना जाएगा, न कि “वित्तीय लेनदार”। ऐसे निवेशक दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016 की धारा 7 के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने
