एनएसए के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 29 जनवरी तक टली

सुप्रीम कोर्ट ने प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हुई हिरासत के खिलाफ उनकी पत्नी गितांजलि जे अंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई मंगलवार को 29 जनवरी तक के लिए टाल दी।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने संक्षिप्त आदेश में कहा, “इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी, 2026 को होगी।”

इससे पहले 24 नवंबर 2025 को भी शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई स्थगित की थी, जब केंद्र और लद्दाख प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अंगमो द्वारा दाखिल प्रत्युत्तर पर जवाब देने के लिए समय मांगा था।

गितांजलि अंगमो ने अपनी याचिका में दावा किया है कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पूरी तरह से गैरकानूनी और मनमानी है, जो संविधान द्वारा प्रदत्त उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। संशोधित याचिका में कहा गया है कि “यह हिरासत पुराने एफआईआर, अस्पष्ट आरोपों और कल्पनात्मक आशंकाओं पर आधारित है, जिनका कथित कारणों से कोई तात्कालिक या प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।”

सोमवार को अदालत में अंगमो ने कहा कि “गिरफ्तारी के आदेश में विवेक का प्रयोग नहीं किया गया है और इसमें अप्रासंगिक सामग्री पर भरोसा किया गया है।” उन्होंने यह भी बताया कि उनके पति को हिरासत के पूरे कारण नहीं बताए गए और उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी नहीं दिया गया।

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अंगमो ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पति द्वारा लद्दाख के लेह में दिया गया भाषण किसी प्रकार की हिंसा भड़काने के लिए नहीं था, बल्कि हिंसा रोकने की अपील थी। उन्होंने कहा कि “तथ्यों को तोड़-मरोड़कर उन्हें अपराधी के रूप में पेश किया जा रहा है।”

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। यह गिरफ्तारी लेह में 24 सितंबर को हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दो दिन बाद हुई थी, जिनमें राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे चार लोग मारे गए और 90 से अधिक घायल हुए थे। प्रशासन ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।

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हालांकि, याचिका में साफ तौर पर कहा गया है कि “लेह की घटनाओं का वांगचुक के बयानों या कार्यों से कोई लेना-देना नहीं है।” अंगमो ने यह भी बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि यह लद्दाख की तपस्या और शांति पूर्ण संघर्ष की विफलता है। उन्होंने उस दिन को “अपने जीवन का सबसे दुखद दिन” बताया था।

सोनम वांगचुक को उनके शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए देश और विदेश में कई सम्मान मिल चुके हैं। याचिका में कहा गया है कि तीन दशकों से अधिक समय तक समाज के लिए काम करने वाले व्यक्ति को अचानक निशाना बनाया जाना “पूर्णतः अनुचित और असंगत” है।

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राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लेने की शक्ति देता है जो भारत की रक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते हैं। इसके तहत अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, हालांकि समय से पहले रिहाई भी संभव है।

शीर्ष अदालत ने पिछले साल 29 अक्टूबर को केंद्र और लद्दाख प्रशासन से इस मामले में जवाब मांगा था। अब अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।

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