ओमान के तट के पास एक संदिग्ध ड्रोन हमले में 25 वर्षीय नाविक दीक्षित सोलंकी की मौत के एक महीने बाद, उनके शोकाकुल परिवार ने उनके पार्थिव शरीर की तत्काल वापसी की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अधिकारियों और जहाज प्रबंधन की ओर से स्पष्टता की कमी का हवाला देते हुए दायर की गई इस याचिका पर 6 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच 4 मार्च को एक विस्फोटक से लदे ड्रोन बोट ने तेल टैंकर MT MKD Vyom पर हमला किया था, जिसमें दीक्षित सोलंकी की जान चली गई थी। सोलंकी इस क्षेत्र में इस तरह के हमले के पहले भारतीय हताहत बताए जा रहे हैं।
यह याचिका सोलंकी के पिता अमृतलाल सोलंकी और उनकी बहन मिताली सोलंकी ने अधिवक्ता एस बी तालेकर और माधवी अय्यप्पन के माध्यम से दायर की है। परिवार ने केंद्र सरकार को नाविक के अवशेषों की वापसी की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश देने की मांग की है, क्योंकि अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
पार्थिव शरीर की वापसी के अलावा, परिवार ने यह भी अनुरोध किया है कि अधिकारी घटना से संबंधित सभी जांच और फॉरेंसिक रिकॉर्ड उनके साथ साझा करें।
इस याचिका में कई उच्च-स्तरीय निकायों को प्रतिवादी बनाया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- विदेश मंत्रालय
- बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय
- जहाजरानी महानिदेशालय (DGS)
- वी शिप्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (MT MKD Vyom का प्रबंधन करने वाली कंपनी)
याचिका में एक मुख्य कानूनी तर्क यह दिया गया है कि संविधान के तहत गारंटीकृत गरिमा का मौलिक अधिकार मृत्यु के बाद भी व्यक्ति पर लागू होता है। परिवार का तर्क है कि सरकार और संबंधित अधिकारियों का यह कानूनी और नैतिक कर्तव्य है कि वे मृतक को उनके परिजनों तक समय पर पहुँचाना सुनिश्चित करें।
याचिका में अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और दिशानिर्देशों का भी हवाला दिया गया है, जो समुद्र में मृत्यु के मामलों में उचित प्रबंधन और पार्थिव शरीर की वापसी को अनिवार्य बनाते हैं।
घातक हमले को लगभग 30 दिन बीत चुके हैं, लेकिन परिवार अभी भी अंधेरे में है। याचिका के अनुसार, घटना के बाद सोलंकी के परिवार ने जहाज की मालिक कंपनी को कई ईमेल भेजे, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
याचिका के मुताबिक, कंपनी से प्राप्त एकमात्र जवाब में केवल यह कहा गया कि अवशेषों को बरामद करने और वापस भेजने के “प्रयास जारी हैं”, लेकिन इसमें किसी निश्चित समय सीमा या प्रगति की जानकारी नहीं दी गई।
इस मामले की सुनवाई शनिवार को मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी।

