देश के बहुचर्चित शीना बोरा हत्याकांड की सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले के ट्रायल को पूरा करने के लिए 9 महीने का अतिरिक्त समय दिया है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि इसके बाद समय सीमा को बढ़ाने की किसी भी अर्जी पर विचार नहीं किया जाएगा।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने 16 मार्च को यह आदेश जारी किया। यह फैसला मुंबई की विशेष सीबीआई कोर्ट के जज द्वारा ट्रायल पूरा करने के लिए समय मांगे जाने के बाद आया है।
मुंबई की सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट में चल रहे इस मामले में पहले ही काफी देरी हो चुकी है। ट्रायल की जटिलताओं और गवाहों की लंबी सूची को देखते हुए निचली अदालत ने ऊपरी अदालत से और वक्त देने की गुजारिश की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा, “प्रार्थना को स्वीकार करते हुए ट्रायल पूरा करने का समय 9 महीने के लिए बढ़ाया जाता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि भविष्य में समय सीमा बढ़ाने की किसी भी मांग को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।” कोर्ट के इस रुख से साफ है कि अब इस मामले में जल्द ही अंतिम फैसला आने की उम्मीद है।
ट्रायल की समय सीमा तय करने के साथ-साथ बेंच ने मामले की मुख्य आरोपी इंद्राणी मुखर्जी को भी एक बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इंद्राणी को यह छूट (liberty) दी है कि वह विदेश यात्रा की अनुमति मांगने के लिए एक नया आवेदन दाखिल कर सकती हैं।
बता दें कि इस हत्याकांड की साजिश में मुख्य आरोपी इंद्राणी मुखर्जी और उनके पूर्व पति पीटर मुखर्जी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
शीना बोरा हत्याकांड ने साल 2015 में पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक:
- घटना: अप्रैल 2012 में 24 वर्षीय शीना बोरा की एक कार में गला घोंटकर कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी।
- आरोपी: सीबीआई का आरोप है कि इस हत्याकांड को शीना की मां इंद्राणी मुखर्जी, उनके पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्यामवर राय ने अंजाम दिया था।
- साक्ष्य मिटाना: पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद शव को रायगढ़ जिले के एक जंगल में ले जाकर जला दिया गया था ताकि सबूत मिटाया जा सके।
- खुलासा: यह मामला 2015 तक दबा रहा, लेकिन ड्राइवर श्यामवर राय की एक अन्य मामले में गिरफ्तारी के बाद उसने इस मर्डर मिस्ट्री से पर्दा उठाया। बाद में राय इस केस में सरकारी गवाह बन गया।
इस खुलासे के बाद अगस्त 2015 में इंद्राणी और संजीव खन्ना को गिरफ्तार किया गया, जबकि तीन महीने बाद पीटर मुखर्जी की गिरफ्तारी हुई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद सीबीआई और सेशंस कोर्ट को इस साल के अंत तक इस हाई-प्रोफाइल केस को तार्किक परिणति तक पहुंचाना होगा।

