न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की एक सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में इस सिद्धांत की पुष्टि की कि मध्यस्थता कार्यवाही में क्षेत्राधिकार संबंधी आपत्तियाँ बचाव पक्ष के कथन प्रस्तुत करने से पहले उठाई जानी चाहिए। यह निर्णय मेसर्स विद्यावती कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाम भारत संघ [सिविल अपील संख्या 215/2025]
