सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 (यू.पी. जमींदारी उन्मूलन कानून) की धारा 154 के तहत निर्धारित भूमि सीमा (सीलिंग) के उल्लंघन में किया गया संपत्ति का ट्रांसफर, संशोधन से पहले के कानूनी ढांचे के तहत पूरी तरह से शून्य नहीं, बल्कि केवल शून्यकरणीय (voidable) माना
