क्रिकेट मैच की घटना के बाद विवादित तोड़फोड़ पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र प्राधिकरण से सवाल किए

सुप्रीम कोर्ट ने सिंधुदुर्ग जिले में एक आवासीय और व्यावसायिक संपत्ति के विध्वंस से संबंधित अवमानना ​​का आरोप लगाने वाली याचिका के संबंध में महाराष्ट्र के अधिकारियों से जवाब मांगा है। हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी में भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के दौरान भारत विरोधी नारे लगाए जाने के आरोपों के बाद यह तोड़फोड़ की गई।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अगुवाई वाली पीठ ने याचिका के संबंध में एक नोटिस जारी किया है और अब से चार सप्ताह के लिए सुनवाई तय की है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि तोड़फोड़ न केवल अनुचित थी बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन किए बिना भी की गई।

याचिकाकर्ता की दलील का मूल शीर्ष अदालत के 13 नवंबर, 2024 के फैसले के कथित उल्लंघन में निहित है, जिसने संपत्ति के विध्वंस पर राष्ट्रव्यापी दिशा-निर्देश स्थापित किए थे। ये दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना और संपत्ति के मालिक को जवाब देने के लिए 15 दिन की अवधि दिए बिना किसी भी संपत्ति को नष्ट करने पर रोक लगाते हैं।

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