न्यायिक प्रशासन से जुड़े फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया पर एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाई कोर्ट को अपने ही प्रशासनिक निर्णयों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने से रोकने वाली कोई कानूनी पाबंदी नहीं है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने नम्रता नियोपाने व अन्य की ओर से दायर एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें राहत के लिए हाई कोर्ट के न्यायिक पक्ष (जुडिशियल साइड) का रुख करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए शीर्ष अदालत ने उनके सेवा समाप्ति (टर्मिनेशन) आदेश पर छह सप्ताह की अंतरिम रोक लगा दी है, ताकि वे इस अवधि में अपनी याचिका संबंधित हाई कोर्ट में दाखिल कर सकें।
मामले की पृष्ठभूमि और दलीलें
यह विवाद याचिकाकर्ताओं के खिलाफ पारित किए गए सेवा समाप्ति के एक आदेश के बाद शुरू हुआ था। याचिकाकर्ताओं के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी कि हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ (फुल कोर्ट) ने उनके मुख्य प्रतिवेदन (रिप्रेजेंटेशन) पर विचार किए बिना ही यह सेवा समाप्ति का आदेश पारित कर दिया था। इस आदेश से तत्काल राहत पाने के लिए याचिकाकर्ताओं ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और एक रिट याचिका के साथ स्थगन (स्टे) आवेदन दायर किया।
सुप्रीम कोर्ट का कानूनी विश्लेषण
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य रूप से इस अधिकार क्षेत्र पर विचार किया कि क्या हाई कोर्ट के किसी प्रशासनिक फैसले को उसी हाई कोर्ट के न्यायिक पक्ष में चुनौती दी जा सकती है। इस बिंदु पर कानूनी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए पीठ ने टिप्पणी की:
“हमारा विचार है कि याचिकाकर्ता न्यायिक पक्ष में हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं। हाई कोर्ट द्वारा अपने ही प्रशासनिक आदेश के खिलाफ रिट याचिका पर सुनवाई करने पर कोई रोक नहीं है।”
अदालत का निर्णय
इस कानूनी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को वापस हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि इस बीच याचिकाकर्ताओं को किसी नुकसान का सामना न करना पड़े। पीठ ने आदेश दिया:
“याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने में सक्षम बनाने के लिए सेवा समाप्ति के आदेश को आज से छह सप्ताह की अवधि तक प्रभावी नहीं किया जाएगा।”
सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिका और उससे जुड़े सभी लंबित आवेदनों का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि “सभी दलीलें खुली रखी गई हैं”, ताकि दोनों पक्ष हाई कोर्ट के समक्ष अपनी पूरी कानूनी बात रख सकें।
मामले का विवरण:
मामले का शीर्षक: नम्रता नियोपाने एवं अन्य बनाम रजिस्ट्रार जनरल, सिक्किम हाई कोर्ट एवं अन्य
मामला संख्या: रिट याचिका (सिविल) संख्या 758/2026
पीठ: जस्टिस जॉयमाल्या बागची, जस्टिस विपुल एम. पांचोली
दिनांक: 15-06-2026

