सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एआईएडीएमके नेता सैदई एस दुरईसामी द्वारा दायर उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एम के स्टालिन के खिलाफ 2011 विधानसभा चुनाव में कथित भ्रष्ट आचरण के आरोपों वाली उनकी चुनाव याचिका खारिज करने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
दुरईसामी ने 2011 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कोलाथुर सीट से चुनाव लड़ा था और वह स्टालिन से 2,739 मतों से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण के आरोप लगाते हुए मद्रास हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी।
वर्ष 2017 में हाईकोर्ट ने उनकी चुनाव याचिका खारिज कर दी थी।
याचिका में दुरईसामी ने आरोप लगाया था कि कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं को धन वितरित किया गया और चुनाव खर्च निर्धारित सीमा से अधिक किया गया। उन्होंने कथित “सप्लीमेंटरी काउंटिंग” का मुद्दा भी उठाया था।
एआईएडीएमके नेता ने यह भी कहा था कि डीएमके कार्यकर्ताओं ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल किया, जिनमें सामुदायिक भोजन, कूरियर के माध्यम से नकदी भेजना, अखबारों में नोट रखना और उपभोक्ता वस्तुएं खरीदने के लिए पर्चियां बांटना शामिल था।
उन्होंने इसे तथाकथित “तिरुमंगलम फॉर्मूला” बताते हुए कहा था कि यह रिश्वत देने का “नवीन” तरीका है और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।
मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दुरईसामी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। गुरुवार को शीर्ष अदालत ने इस पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

