सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में सार्वजनिक निर्माण कार्यों के ठेके मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी कंपनियों को दिए जाने के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने पक्षकारों को दो सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने की अनुमति दी।
याचिकाकर्ता संगठनों — सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना — की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने राज्य सरकार द्वारा हाल ही में दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि कई ठेके मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली कंपनियों को दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि मामले में सीबीआई जांच होनी चाहिए क्योंकि आरोप गंभीर हैं और राज्य पुलिस से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
शीर्ष अदालत ने 2 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश सरकार को 2015 से 2025 तक दिए गए सभी सार्वजनिक निर्माण ठेकों का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों की कंपनियों को दिए गए ठेकों का विवरण भी शामिल करने को कहा गया था।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने आदेश सुरक्षित रख लिया और लिखित प्रस्तुतियाँ दाखिल करने की अनुमति दी।
अब अदालत यह तय करेगी कि मामले में किसी केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की आवश्यकता है या नहीं।

