सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की उस याचिका को तीन जजों की बड़ी बेंच को भेज दिया है, जिसमें उन्होंने अपना पासपोर्ट वापस करने की मांग की है। 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े दस्तावेजों की कथित हेराफेरी के मामले में जुलाई 2023 में मिली नियमित जमानत की शर्त के तौर पर उनका पासपोर्ट फिलहाल ट्रायल कोर्ट की कस्टडी में जमा है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने रजिस्ट्री को इस मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत के समक्ष रखने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि चूंकि उन्हें नियमित जमानत तीन जजों की बेंच ने दी थी, इसलिए जमानत की शर्तों में किसी भी बदलाव की अर्जी पर सुनवाई करना समान शक्ति वाली बेंच के लिए ही उचित होगा।
सुश्री सीतलवाड़ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि कार्यकर्ता अपने यात्रा दस्तावेजों की वापसी चाहती हैं। 19 जुलाई 2023 को मिली नियमित जमानत के दौरान शीर्ष अदालत ने यह शर्त रखी थी कि उनका पासपोर्ट सत्र अदालत की कस्टडी में रहेगा और वह गवाहों को प्रभावित करने की कोई कोशिश नहीं करेंगी।
2023 के अपने आदेश में तीन जजों की बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया था जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार करते हुए तुरंत सरेंडर करने को कहा गया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के रुख को “विचित्र” और “विरोधाभासी” बताया था। अदालत ने यह भी कहा था कि क्योंकि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और साक्ष्य मुख्य रूप से दस्तावेजी हैं, इसलिए उन्हें हिरासत में रखकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है।
तीस्ता सीतलवाड़, पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और पूर्व डीजीपी आर.बी. श्रीकुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई 24 जून 2022 को जकिया जाफरी मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई थी। उस फैसले में अदालत ने 2002 के दंगों के पीछे किसी “बड़ी साजिश” के आरोपों को खारिज करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मिली क्लीन चिट को बरकरार रखा था।
जकिया जाफरी मामले के फैसले के अगले ही दिन, 25 जून 2022 को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने सीतलवाड़ को गिरफ्तार कर लिया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए झूठे सबूत और दस्तावेज गढ़े। सुश्री सीतलवाड़ का तर्क रहा है कि 2022 के फैसले में उनके खिलाफ टिप्पणियां उन्हें सुने बिना की गईं, क्योंकि गुजरात सरकार ने उस मामले में उनके हस्तक्षेप का विरोध किया था।
अपनी गिरफ्तारी के बाद से सीतलवाड़ ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। जुलाई 2022 में अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला शीर्ष अदालत पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पहले अंतरिम सुरक्षा दी और बाद में नियमित जमानत प्रदान की। इन सुनवाइयों के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया था कि “एक सामान्य अपराधी भी कुछ हद तक अंतरिम राहत का हकदार होता है।”
अब इस नई अर्जी के जरिए वह विदेश यात्रा के उद्देश्य से अपना पासपोर्ट वापस मांग रही हैं। अब यह मामला मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित की जाने वाली तीन जजों की बेंच के सामने पेश किया जाएगा।

