सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को व्यापमं घोटाले के व्हिसलब्लोअर डॉ. आनंद राय के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज आपराधिक मामले को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि यह कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं थी।
सुप्रीम कोर्ट ने व्यापमं परीक्षा घोटाले के व्हिसलब्लोअर और नेत्र चिकित्सक डॉ. आनंद राय के खिलाफ दर्ज एससी/एसटी एक्ट के तहत आपराधिक मामले को मंगलवार को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले में की गई कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं थी।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने डॉ. राय की अपील को स्वीकार करते हुए कहा,
“हमने एससी/एसटी एक्ट के दायरे की समीक्षा की है और यह कार्रवाई कानून के अनुसार नहीं है। अपील स्वीकार की जाती है।”
डॉ. राय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता सुमीर सोढी ने पक्ष रखा।
यह मामला 15 नवम्बर 2022 को मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के धारड़ गांव में बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान हुई एक घटना से जुड़ा है।
एफआईआर दर्ज कराने वाले विकास पारगी ने आरोप लगाया था कि डॉ. राय सहित 40-45 लोगों के एक समूह ने सांसद, विधायक, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के वाहन रोक दिए, लगभग एक घंटे तक रास्ता जाम किया, अपशब्द कहे और पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की जो रास्ता साफ कराने पहुंचे थे।
इस मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट), रतलाम ने 18 मार्च 2025 को डॉ. राय के खिलाफ आरोप तय किए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी 2023 को डॉ. आनंद राय को जमानत दे दी थी और मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
डॉ. राय ने आरोप निर्धारण को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप एससी/एसटी एक्ट की आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए मामले को खारिज कर दिया।
डॉ. आनंद राय मध्य प्रदेश व्यापमं घोटाले को उजागर करने वाले प्रमुख व्हिसलब्लोअर रहे हैं, जिसमें मेडिकल कॉलेजों में दाखिला और सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार के बड़े स्तर पर आरोप लगे थे।

