सुप्रीम कोर्ट में आया हत्या का ऐसा मामला जिसे देख न्यायाधीश बोले ऐसा केस पहले नही देखा

Supreme Court में हत्या(murder) का ऐसा मामला जज के सामने पहुँचा जिसे देखने के बाद न्यायाधीश बोले
ऐसा हत्या का केस अपने जीवनकाल में पहली बार देखा। 

ऐसा जज साहब के कहने से अंदाजा लगाया जा सकता कि हत्या की घटना कितनी खौफनाक रही होगी।

देश की सर्वोच्च न्यायलय ने महिला की भयावह तरीके से की गई हत्या(murder) और उसके बॉडी के अंगों के निकाल लेने के मामले में आरोपी युवक की मौत की सजा (death penalty) पर रोक लगा दी है।

इस घटना की चर्चा चारोंतरफ़ हो रही है खुद चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि ‘ऐसा मामला पहले कभी नही देखा

कोर्ट में आरोपी पक्ष के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा से पूछा है कि आपके मुवक्किल(client) ने जघन्य अपराध किया है इस पर आप क्या राय देंगे।

पूरा प्रकरण

पूरा मामला महिला की हत्या करके सबूतों को नष्ट करने का है। 

एक बिल्डिंग में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाले मोहन सिंह को एक महिला की हत्या करने और सबूतों को नष्ट करने के मामले में दोषी पाया गया है।

महिला का मर्डर करने के बाद आरोपी मोहन सिंह ने महिला के पेट को चीर उसमे कपड़ा भर दिया था और उसे एक तार से सील दिया था ।

जब फोरेंसिक एक्सपर्ट ने जांच की तो महिला की बॉडी से कई अंग गायब मिले।

राजस्थान कोर्ट ने मोहन की मौत की सजा को 9 अगस्त तक बरकरार रखा था। 

लेकिन आरोपी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आगे की सुनवाई के लिए गुहार लगाई गई थी।

कोर्ट ने आरोपी पक्ष के एडवोकेट से पूछे कठोर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की सहमति जताते हुए आरोपी के वकील से मामले को लेकर तमाम सवाल जवाब किये।

कोर्ट ने आरोपी के वकील से पूछा कि आपके मुवक्किल ने महिला का पेट क्यों चीरा कपडा भर कर पेट सिलने को लेकर
वकील से पूछा कि आपका मुवक्किल क्या सर्जन है। 

आरोपी के वकील की प्रतिक्रिया

आरोपी पक्ष के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि मोहन सिंह को इस मामले में फसाया जा रहा है ।

वकील ने दलील देते हुए कहा कि निचली अदालत (lower court) ने कभी डीएनए एक्सपर्ट से जांच नही करवाई और
न ही पुलिस ने आसपास एरिया के सीसीटीवी फुटेज खंगालने की जरूरत समझी।

सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया- 

पूरे मामले को संज्ञान लेने के बाद चीफ जस्टिस (सीजेआई) एसए बोबडे ,एस ए बोपन्ना और वी राम सुब्रमण्यम की संयुक्त पीठ ने फिलहाल मौत की सजा पर रोक लगा दी है।

और आगे की सुनवाई के लिए सभी दस्तावेजों को कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश दिए हैं।

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