व्हाट्सअप चैट को सुप्रीम कोर्ट ने सबूत मानने से किया इनकार

नई दिल्ली—-सुप्रीम कोर्ट ने कहा की व्हाट्सएप पर आदान प्रदान किये गए मेसेज का कोई गोपनीय मूल नही है।

चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा आजकल व्हाट्सअप संदेशों का गोपनीय मूल्य क्या है। सोशल मीडिया पर इन दिनों कुछ भी बनाया और हटाया जा सकता है। हम व्हाट्सअप संदेशों को कोई मूल्य नही देते। 

यह मामला 2 दिसंबर 2016 को दक्षिण दिल्ली नगर निगम और A to Z इंफ्रासेविसेज और एक अन्य इकाई के एक संघ के मध्य अपशिष्ट पदार्थो के संग्रह और परिवहन के लिए एक समझौते से संबंधित है।

2017 में atoz ने अनुबंधित कार्य के एक हिस्से को पूरा करने के लिए Quippo infrastructure के साथ एक और समझौता किया और यह सहमति हुई की A2Z द्वारा प्राप्त राशि एक एस्क्रो खाते में जमा की जाएगी। जिससे पार्टियों को भुगतान किया जाएगा।

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2020 में a2z ने अनुबंध को समाप्त कर दिया जिसके बाद quippo ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया quippo ने हाई कोर्ट को एक व्हाट्सएप संदेश के बारे में बताया की quippo के 8.18 करोड़ रुपये के भुगतान के बारे में।a2z ने हालांकि कंपनी को पैसा जमा करने के लिए कहा गया था। 

प्रथम दृष्टया हम एस्क्रो खाते में पैसा जमा करने के हाई कोर्ट के संदेश से संतुष्ट नही है। हम व्हाट्सएप संदेश में कथित प्रवेश पर विचार नही कर रहे है। अगर देर नही हुई है,तो मध्यस्थ के पास जाएं और पक्ष मध्यस्थों द्वारा बाध्य होंगे पुरुस्कार सुप्रीम कोर्ट ने कहा हालांकि quippo ने अपने रुख पर जोर दिया। जिसके बाद पीठ ने अधिवक्ता से a2z द्वारा दायर याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। 

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